भारत के इनकम टैक्स सिस्टम में 1 अप्रैल 2026 से एक ऐतिहासिक बदलाव होने वाला है। केंद्र सरकार 'आयकर अधिनियम 1961' को बदलकर नया 'आयकर अधिनियम 2025' (New Income Tax Act) लागू करने की तैयारी में है। इस नए कानून का सबसे बड़ा और सीधा असर उन दस्तावेजों पर पड़ने वाला है, जिनका नाम हर नौकरीपेशा और टैक्सपेयर की जुबान पर रहता है। 1 अप्रैल से आपके सैलरी सर्टिफिकेट यानी फॉर्म-16 और टैक्स पासबुक यानी फॉर्म 26AS के नाम इतिहास बन जाएंगे। सरकार का मकसद टैक्स कानूनों को सरल बनाना और पुराने जटिल नियमों को खत्म करना है, जिससे टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया और भी आसान हो सके।
फॉर्म-16 और 26AS के नाम में क्या होगा बदलाव?
मौजूदा समय में, फॉर्म-16 वह दस्तावेज है जिसे कंपनियां अपने कर्मचारियों को देती हैं, जिसमें साल भर की सैलरी और काटे गए टीडीएस (TDS) का ब्यौरा होता है। वहीं, फॉर्म 26AS में आपके पैन कार्ड पर जमा हुए कुल टैक्स की जानकारी होती है। नए टैक्स एक्ट के तहत, इन फॉर्मों को नए नंबर और नए नाम दिए जाएंगे। जानकारी के मुताबिक, फॉर्म-16 को अब 'फॉर्म 116' और फॉर्म 26AS को 'फॉर्म 126' के नाम से जाना जा सकता है। हालांकि, इनके भीतर की मुख्य जानकारी वही रहेगी, लेकिन इनकी नंबरिंग सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया जाएगा ताकि नए कानून के साथ तालमेल बिठाया जा सके।
स्क्रूटिनी की प्रक्रिया होगी आसान
टैक्स नोटिस और स्क्रूटनी की प्रक्रिया होगी आसान नए इनकम टैक्स एक्ट का एक बड़ा उद्देश्य टैक्सपेयर्स को कानूनी उलझनों से बचाना है। अभी तक इनकम टैक्स की कई धाराएं इतनी जटिल थीं कि एक आम आदमी के लिए उन्हें समझना मुश्किल था। 1 अप्रैल से लागू होने वाले नियमों में 'स्क्रूटनी' (जांच) और टैक्स नोटिस भेजने की समय सीमा को भी युक्तिसंगत बनाया गया है। अब टैक्स विभाग पुराने मामलों को सालों तक खींच नहीं पाएगा। इसके अलावा, री-असेसमेंट (दोबारा जांच) के नियमों को भी आसान बनाया गया है, जिससे ईमानदार टैक्सपेयर्स को बेवजह के डर से मुक्ति मिलेगी।
TDS नियमों में बदलाव
टीडीएस (TDS) और फाइलिंग में बड़े बदलाव नए कानून के तहत टीडीएस कटौती के नियमों में भी बड़े बदलावों की उम्मीद है। सरकार कई अलग-अलग टीडीएस दरों को मर्ज करके एक मानक दर (Standard Rate) लाने की योजना बना रही है। इससे उन छोटे व्यापारियों और फ्रीलांसरों को मदद मिलेगी जिन्हें अलग-अलग ट्रांजैक्शन पर अलग-अलग दरों से टैक्स चुकाना पड़ता था। साथ ही, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की प्रक्रिया को और भी ज्यादा 'प्री-फिल्ड' (Pre-filled) बनाया जाएगा। यानी आपको ज्यादातर जानकारी पहले से ही भरी हुई मिलेगी, बस आपको उसे वेरिफाई करना होगा।
क्यों पड़ी नए एक्ट की जरूरत?
1961 का आयकर कानून पिछले 60 सालों में सैकड़ों बार बदला जा चुका था, जिससे यह काफी पेचीदा हो गया था। नया टैक्स एक्ट न केवल सरल भाषा में है, बल्कि यह डिजिटल इंडिया के दौर के हिसाब से तैयार किया गया है। इसमें मुकदमों को कम करने और टैक्सपेयर के अधिकारों को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। सरकार चाहती है कि टैक्स जमा करना सजा के बजाय एक सरल प्रक्रिया बने। 1 अप्रैल 2026 से जब आप अपना नया टैक्स पोर्टल खोलेंगे, तो आपको पुराने फॉर्म्स की जगह नए डिजिटल इंटरफेस और नए नाम वाले फॉर्म्स नजर आएंगे।
