Sonia Gandhi : कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर देश के ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के सामाजिक ताने-बाने, लोकतंत्र और संस्थाओं को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। इस सरकार के सत्ता से जाने के बाद भी हमारी व्यवस्थाओं को फिर से स्वस्थ और मजबूत स्थिति में लाने में समय लगेगा। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को बड़े स्तर पर प्रयास करने होंगे। कांग्रेस नेता ने ये बातें 'दि हिंदू' को दिए अपने इंटरव्यू में कही हैं।
राजनीति सहित कई मुद्दों पर रखी अपनी बात
इस इंटरव्यू में सोनिया ने भारत आने, अपनी राजनीतिक यात्रा सहित कई मुद्दों पर अपनी राय रखी है। अपने ऊपर लिखी गईं किताबों के बारे में उन्होंने कहा कि 'मुझे अंदाजा भी नहीं था कि मेरे ऊपर इतनी सारी किताबें लिखी गई हैं! लेकिन सच कहूं तो मुझे कभी अपने बारे में लिखी किताबें पढ़ने का मन नहीं हुआ। बहुत साल पहले राजीव और मैंने यह समझ लिया था कि हमारे बारे में जो कुछ भी लिखा जा रहा है, उस सब पर नजर रखने का कोई मतलब नहीं है। लेकिन जैसा कि मैंने अपनी किताब में कहा है, एक समय ऐसा आया जब मुझे लगा कि मुझे अपनी कहानी खुद बतानी चाहिए।'
'यह सिर्फ हम दोनों की प्रेम कहानी नहीं'
अपनी आत्मकथा 'Belonging: A Journey of Love' के बारे में उन्होंने कहा कि 'मैंने गंभीरता से लिखना करीब पांच साल पहले ही शुरू किया। यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया नहीं थी। कभी शब्द और विचार सहजता से निकलते थे, तो कभी कुछ भी नहीं सूझता था और मैं झुंझलाकर हार मान लेती थी।' राजीव गांधी और भारत के साथ जुड़ाव के बारे में उन्होंने बताया कि 'यह सिर्फ हम दोनों की प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि यह कहानी भी है कि कैसे मुझे राजीव के परिवार और उस देश से प्यार हो गया, जिससे वे जुड़े थे और फिर कैसे मैं भी उस देश का हिस्सा बन गई। यह उस प्रेम की कहानी भी है, जिसने मुझे सार्वजनिक जीवन में आने के लिए प्रेरित किया। जब मैंने देखा कि जिन उद्देश्यों के लिए उनके परिवार ने इतनी कुर्बानियां दी थीं, वे खतरे में पड़ रहे हैं और पार्टी कमजोर हो रही है, तो मुझे लगा कि मुझे कुछ करना चाहिए।'
उस समय मैं कहीं ज्यादा हंसती थी-सोनिया
सोनिया ने कहा, 'जिन मूल्यों के साथ मैं बड़ी हुई, वे आज भी मेरे भीतर जीवित हैं। मैंने हमेशा उनके प्रति ईमानदार बने रहने की पूरी कोशिश की है। परिवार और दोस्तों के प्रति वफादारी, दूसरों के प्रति ईमानदारी और संवेदनशीलता तथा अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाने की भावना। मुझे लगता है कि मैं यह कह सकती हूं कि इन मामलों में मैं आज भी वही इंसान हूं, जिससे राजीव 60 साल पहले मिले थे। हालांकि, उस समय मैं कहीं ज्यादा मुस्कुराती और हंसती थी!'
'भारत के बारे में कुछ नहीं पता था'
कांग्रेस नेता ने कहा कि 'जब मैं एक युवा दुल्हन के रूप में भारत आई थी, तब मुझे इस देश के बारे में कुछ भी नहीं पता था। आज मैं जो कुछ भी हूं और जितना कुछ जानती हूं, वह सब मैंने उनसे सीखा है। उनका साहस, दूसरों के प्रति संवेदनशीलता, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भारत के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और सबसे बढ़कर, कर्तव्य के प्रति उनका समर्पण, जो उन दोनों के लिए हर दूसरी चीज से बढ़कर था, इन सबने मुझे प्रेरित किया। मुश्किल और असमंजस के दौर में इन्हीं मूल्यों ने मुझे मजबूती से टिके रहने का हौसला दिया।'
