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शेयर बाजार में 35 साल की सबसे बड़ी दिवाली रैली, क्या बदल गया जो विदेशी निवेशक लौट आए?

दिवाली से पहले भारतीय शेयर बाजार में ऐसी तेजी आई, जिसने निवेशकों को चौंका दिया। सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल के साथ विदेशी निवेशकों ने भी रिकॉर्ड खरीदारी की। आखिर ऐसा क्या बदला कि विदेशी पैसा भारत लौटने लगा?

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Share Market Rally

दिवाली से ठीक पहले भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। पिछले कुछ दिनों से लगातार चढ़ रहे बाजार ने धनतेरस के दिन निवेशकों को बड़ा तोहफा दिया। 6 नवंबर को सेंसेक्स 1,718.01 अंक यानी 2.16 फीसदी की छलांग लगाकर 81,028.02 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 493.75 अंक यानी 2.01 फीसदी चढ़कर 25,030.35 पर पहुंच गया। खास बात यह है कि दिवाली से पहले सात कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 10.6 फीसदी चढ़ा, जो पिछले 35 साल में दिवाली से पहले की सबसे बड़ी तेजी बताई जा रही है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी मानी जा रही है। ऐसे में आईये जानते हैं आखिर ऐसा क्या हुआ जो विदेशी निवेशक लौट आये हैं?

विदेशी निवेशकों ने की रिकॉर्ड खरीदारी

पिछले कुछ महीनों से विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे थे। लेकिन अब उनका रुख बदलता नजर आ रहा है। NSE के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 5 नवंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब 14,975 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यह लगभग छह साल में एक दिन की उनकी सबसे बड़ी खरीदारी है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में करीब 5 अरब डॉलर का निवेश किया है। इससे बाजार को मजबूत सहारा मिला है।

अमेरिकी AI शेयरों में गिरावट से भारत को फायदा

दुनिया के दूसरे शेयर बाजारों में इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिल रही है। अमेरिका का नैस्डैक इंडेक्स करीब 6 फीसदी तक टूट गया। निवेशकों को डर है कि AI कंपनियों में जरूरत से ज्यादा पैसा लगाया जा रहा है और इन कंपनियों के शेयरों की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं। ऐसे में विदेशी निवेशक जोखिम कम करने के लिए अपना पैसा दूसरी जगह लगा रहे हैं। भारत को इसका फायदा मिल रहा है, क्योंकि यहां AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर अमेरिकी कंपनियों जितनी भारी पूंजी नहीं लगाई गई है।

कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के नतीजों ने भी दिया सहारा

भारतीय बाजार में तेजी की एक और वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल और कंपनियों की लागत कम हो सकती है। इसके अलावा निफ्टी 50 की जिन कंपनियों ने अब तक दूसरी तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं, उनका कुल मुनाफा सालाना आधार पर करीब 19 फीसदी बढ़ा है। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।

क्या आगे भी जारी रहेगी बाजार की तेजी?

हालांकि बाजार की इस तेजी को देखकर बहुत ज्यादा उत्साहित होने से पहले कुछ जोखिम समझना जरूरी है। इस रैली में बड़ी कंपनियों के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट रही। NSE पर 2,236 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि 937 शेयरों में तेजी आई। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा बढ़ोतरी, रुपये में कमजोरी और वैश्विक तनाव बाजार के लिए चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में निवेशकों को किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी के फंडामेंटल और जोखिम का आकलन जरूर करना चाहिए। बाजार में तेजी हमेशा जारी रहेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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