अध्यात्म

नरक चतुर्दशी पर कितने दीये जलाएं, छोटी दिवाली पर कितने दीये लगाए जाते हैं, जानें काली चौदस पर दीयों की सही संख्या

Narak Chaturdashi 2026: छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी पर दीपक जलाने की खास परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन 14 दीये जलाना शुभ होता है। जानें इनका महत्व और सही जगह।

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नरक चतुर्दशी पर कितने दीये जलाएं (फोटो: AI)

Narak Chaturdashi 2026: दीवाली का त्योहार आते ही घरों में साफ-सफाई से लेकर सजावट और पूजा-पाठ की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व में नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली का भी खास महत्व है। इस दिन लोग घर के कोनों में दीपक जलाते हैं और यमराज की पूजा करते हैं। आपने भी अपने घर में बड़े-बुजुर्गों को छोटी दिवाली पर 14 दीये जलाते हुए देखा होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर इस दिन 14 दीपक ही क्यों जलाए जाते हैं? क्या इनकी संख्या को लेकर कोई खास धार्मिक मान्यता है? आइए जानते हैं नरक चतुर्दशी पर कितने दीये जलाने चाहिए और इन्हें घर में कहां-कहां रखना शुभ माना जाता है।

नरक चतुर्दशी पर कितने दीये जलाने चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली पर 14 दीपक जलाना शुभ माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन कई घरों में 14 दीये जलाने की परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में दीपक जलाने की परंपरा में थोड़ा अंतर हो सकता है। कुछ लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार इससे ज्यादा दीपक भी जलाते हैं।

छोटी दिवाली पर 14 दीये जलाने का क्या है महत्व?

छोटी दिवाली पर 14 दीपक जलाने के पीछे यमराज से जुड़ी धार्मिक मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि इस दिन घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक जलाने से नकारात्मकता दूर होती है और सुख-शांति का माहौल बनता है। इन दीपकों को यम दीप भी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, यमराज के नाम से दीपक जलाने पर परिवार के सदस्यों को लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। यही कारण है कि छोटी दिवाली पर दीपदान को विशेष महत्व दिया जाता है।

नरक चतुर्दशी पर कहां-कहां जलाएं दीपक?

इस दिन केवल घर के मंदिर में ही नहीं, बल्कि घर के दूसरे हिस्सों में भी दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार, आप इन जगहों पर दीपक रख सकते हैं।

घर का मुख्य दरवाजा: घर के प्रवेश द्वार पर दीपक जलाने से सुख-समृद्धि का स्वागत करने की मान्यता है।

पूजा घर: भगवान के सामने घी या तेल का दीपक जलाकर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।

दक्षिण दिशा: यमराज को दक्षिण दिशा का अधिपति माना जाता है। इसलिए इस दिशा में यम दीप जलाने की परंपरा है।

घर का आंगन: आंगन में दीपक रखने से घर में रोशनी और सकारात्मकता का माहौल बनता है।

रसोई घर: रसोई में भी एक दीपक जलाने की परंपरा कई घरों में निभाई जाती है।

घर के बाहर: कुछ लोग घर के बाहर या प्रवेश द्वार के पास भी दीपक रखते हैं।

काली चौदस पर कितने दीये जलाए जाते हैं?

नरक चतुर्दशी को कई जगह काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। खासतौर पर गुजरात और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में इस दिन काली चौदस मनाने की परंपरा है। इस दिन मां काली की पूजा की जाती है और बुरी शक्तियों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। दीपक जलाने को लेकर यहां भी अलग-अलग मान्यताएं हैं। सामान्य तौर पर 14 दीपक जलाने की परंपरा प्रचलित है, जबकि कुछ लोग पूजा और घर की सजावट के लिए अतिरिक्त दीपक भी लगाते हैं।

छोटी दिवाली पर यमराज के नाम का दीपक कैसे जलाएं?

छोटी दिवाली पर शाम के समय घर की साफ-सफाई करने के बाद दीपक जलाने की परंपरा है। यमराज के नाम का दीपक जलाते समय सरसों के तेल का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। कई घरों में इस दीपक में रूई की दो बत्तियां रखी जाती हैं। इसे घर के मुख्य दरवाजे के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। दीपक जलाते समय परिवार की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-शांति की कामना करें। ध्यान रखें कि ये सभी बातें धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग जगहों पर पूजा के तरीके और रीति-रिवाज बदल सकते हैं। सबसे जरूरी है कि त्योहार को श्रद्धा, खुशी और सुरक्षित तरीके से मनाया जाए।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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