आज के समय में पर्सनल लोन (Personal Loan) लेना काफी आसान हो गया है। बैंक और वित्तीय संस्थान कुछ ही समय में लोन ऑफर दे देते हैं। लेकिन किसी ऑफर को सिर्फ इसलिए स्वीकार करना सही नहीं है क्योंकि उसमें ब्याज दर कम दिखाई दे रही है। असल में लोन की कुल लागत पर ब्याज के साथ कई दूसरे शुल्क और शर्तों का भी असर पड़ता है। इसलिए लोन एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले कुछ जरूरी बातों की जांच कर लेना चाहिए-
केवल ब्याज दर देखकर न लें फैसला
लोन लेते समय सबसे पहले ब्याज दर पर ध्यान जाता है, लेकिन यही पूरी तस्वीर नहीं बताती। प्रोसेसिंग फीस, अन्य चार्ज और लोन की अवधि कुल भुगतान को काफी बदल सकते हैं। इसलिए अलग-अलग बैंकों के ऑफर की तुलना करते समय सिर्फ ब्याज दर के बजाय पूरी लागत देखें।
Key Facts Statement जरूर पढ़ें
लोन लेने से पहले बैंक की ओर से दिए गए KFS (Key Facts Statement) को ध्यान से पढ़ना जरूरी है। इसमें लोन की रकम, ब्याज दर, अवधि और लागू शुल्क जैसी महत्वपूर्ण जानकारी होती है। अगर आप एक से ज्यादा बैंकों से लोन ऑफर देख रहे हैं, तो उनके KFS को साथ रखकर तुलना करने से वास्तविक अंतर आसानी से समझ आ सकता है।
EMI के साथ कुल ब्याज भी देखें
कम EMI देखकर लंबी अवधि का लोन लेना आकर्षक लग सकता है, लेकिन इससे ब्याज चुकाने की अवधि बढ़ जाती है और कुल भुगतान ज्यादा हो सकता है। वहीं बहुत छोटी अवधि चुनने पर EMI आपकी मासिक आय पर दबाव डाल सकती है। इसलिए ऐसी अवधि चुनें जिसमें EMI आसानी से चुकाई जा सके और कुल ब्याज भी जरूरत से ज्यादा न हो।
सभी चार्ज और प्रीपेमेंट नियम जांचें
लोन लेने से पहले प्रोसेसिंग फीस, लेट पेमेंट चार्ज, बाउंस फीस और प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर से जुड़े शुल्क की जानकारी जरूर लें। भविष्य में अगर आपके पास बोनस या अतिरिक्त रकम आती है और आप लोन जल्दी खत्म करना चाहते हैं, तो प्रीपेमेंट की सुविधा आपके लिए उपयोगी हो सकती है।
अपनी जरूरत से ज्यादा लोन न लें
बैंक जितनी रकम देने के लिए तैयार है, उतना लोन लेना जरूरी नहीं है। पहले यह तय करें कि आपको वास्तव में कितने पैसे की जरूरत है। ज्यादा रकम उधार लेने का मतलब ज्यादा EMI और ब्याज का बोझ है। साथ ही लोन की EMI इतनी होनी चाहिए कि आपके जरूरी खर्च, सेविंग और इमरजेंसी जरूरतों के लिए पर्याप्त पैसा बचा रहे।
