आम निवेशकों को बड़ी राहत मिलने वाली है। बैंक एफडी, शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश की जानकारी जल्द ही एक ही स्टेटमेंट में मिलेगी। आरबीआई इसके लिए कदम उठा रहा है। बुधवार को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि सेंट्रल बैंक, SEBI के रेगुलेशन वाले डिपॉजिटरी को 'कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट' (CAS) में डिपॉजिट अकाउंट से जुड़ी जानकारी शामिल करने में मदद कर रहा है। उम्मीद है कि यह उपाय 31 दिसंबर, 2026 तक लागू हो जाएगा। इसके लागू होने के बाद निवेशकों को अपने बैंक डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड, स्टॉक और दूसरी सिक्योरिटिज की जानकारी एक ही जगह मिल पाएगी। इस कदम से परिवारों के लिए अपनी संपत्ति पर नजर रखना, टैक्स का हिसाब-किताब करना और उन फाइनेंशियल अकाउंट्स की पहचान करना आसान होगा।
अभी अलग-अलग मिलती है जानकारी
CAS में निवेश की जानकारी शामिल होने का बड़ा फायदा यह होगा कि आप अपने फाइनेंशियल पोर्टफोलियो के अलग-अलग हिस्सों को एक साथ देख सकेंगे। अभी, एक इन्वेस्टर के पास कई बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट, अलग-अलग फंड हाउस के साथ म्यूचुअल फंड और डीमैट अकाउंट होते हैं। इन सभी की जानकारी अलग-अलग स्टेटमेंट के द्वारा मिलती है। वहीं, एक बार डिपॉजिट की जानकारी शामिल हो जाने के बाद, CAS इन होल्डिंग्स की एक मिली-जुली तस्वीर दिखा सकता है। इससे यह समझना आसान हो जाएगा कि इक्विटी, म्यूचुअल फंड और डेट या डिपॉज़िट में कितना पैसा लगाया गया है। जिन परिवारों की FD तीन या चार बैंकों में फैली हुई हैं, उनके लिए पोर्टफोलियो को ट्रैक करना काफी आसान हो जाएगा।
टैक्स का मिलान करना भी आसान होगा
FD और दूसरे डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल इनकम में जुड़ता है। अक्सर इन्वेस्टर्स के कई बैंकों में डिपॉजिट होते हैं, जिससे एक फाइनेंशियल ईयर के दौरान मिले ब्याज का हिसाब रखना मुश्किल हो जाता है। डिपॉजिट की एक साथ जानकारी होने से इनकम-टैक्स रिटर्न भरते समय ब्याज से हुई इनकम का मिलान Form 26AS और एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) से करना आसान हो जाएगा।
नॉमिनेशन की जानकारी पहले से मिलती है
CAS में शामिल इन्वेस्टमेंट के लिए नॉमिनेशन स्टेटस की जानकारी पहले से ही मिलती है। अगर डिपॉजिट की जानकारी भी इसमें जोड़ दी जाए, तो कस्टमर यह पता लगा सकते हैं कि उनकी FD में नॉमिनेशन की जानकारी दर्ज है या नहीं। यह उन परिवारों के लिए खास तौर पर फायदेमंद हो सकता है जिनके कई बैंकों में डिपॉजिट हैं।
पोर्टफोलियो की समीक्षा करना होगा आसान
एक कंसोलिडेटेड स्टेटमेंट से पोर्टफोलियो की समीक्षा करना भी आसान होगा। एक निवेशक को पता होगा कि FD में बहुत ज्यादा पैसा पड़ा है जबकि इक्विटी में निवेश कम है, या इसके उलट स्थिति हो सकती है। डिपॉजिट और मार्केट इन्वेस्टमेंट को एक साथ देखने से निवेशकों को हर निवेश की अलग-अलग समीक्षा करने के बजाय अपने कुल एसेट एलोकेशन का आकलन करने में मदद मिल सकती है।
