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भारत के सितारे बुलंद, 10 साल में 8 ट्रिलियन डॉलर होगी GDP, पीछे रह जाएंगे जर्मनी-जापान

भारत की इकोनॉमी अगले 10 साल में 8 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की हो जाएगी। भारत ने 2030 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का लक्ष्य रखा है। नए अनुमान के मुताबिक 2036 तक 8 ट्रिलियन भी संभव है।

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तेजी से बढ़ेगी भारत की GDP

India Economy Growth : भारत की GDP अगले एक दशक में दोगुनी होकर $8 ट्रिलियन से ज्यादा हो सकती है। Global Investment Firm KKR का मानना है कि ढांचागत सुधार, बुनियादी ढांचे में निवेश और इकोनॉमी के फॉर्मलाइजेशन (Formalisation) ने भारत की ग्रोथ संभावनाओं को पहले के मुकाबले काफी मजबूत किया है।

KKR ने अपनी अक्टूबर 2026 की “Thoughts From the Road Europe and Asia” रिपोर्ट में कहा है कि भारत पहले ही $4 ट्रिलियन डॉलर की GDP तक पहुंच गया है। अगले 10 साल में इसके फिर से दोगुना होने की मजबूत संभावना है। KKR के मुताबिक, भारत की ग्रोथ स्टोरी अभी पूरी नहीं हुई है। पिछले एक दशक में किए गए कई सुधारों का पूरा आर्थिक फायदा अभी सामने आना बाकी है।

अगर भारत यह लक्ष्य हासिल कर लेता है, तो GDP के हिसाब से भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा देश बन जाएगा और एक ही झटके में जर्मनी और जापान जैसे देशों को पीछे छोड़ देगा।

किस रफ्तार से बढ़ सकती है GDP?

KKR का अनुमान है कि भारत आने वाले वर्षों में 10-11% की नॉमिनल GDP ग्रोथ की राह पर बना रह सकता है। निवेश फर्म का मानना है कि 2014 के बाद कई ऐसे ढांचागत सुधार किए गए हैं, जिन्होंने इकोनॉमी की क्षमता और ग्रोथ की सीमाओं को बढ़ा दिया है। इनमें वस्तु एंव सेवा कर (GST), इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड यानी IBC, लेबर मार्केट फॉर्मलाइजेशन, डिजिटलाइजेशन और इन्फ्रा में लगातार निवेश प्रमुख हैं। KKR के मुताबिक, इन बदलावों ने न सिर्फ कारोबारी माहौल बेहतर हुआ है, बल्कि भारतीय कैश फ्लो से जुड़े रिस्क प्रीमियम को भी कम किया है।

रिफॉर्म का पूरा असर दिखना अभी बाकी

भारत की ग्रोथ को लेकर KKR का सबसे बड़ा पॉजिटिव संकेत यह है कि इसे वह पूरी हो चुकी कहानी नहीं मानता। बल्कि, पहले से लागू हुए सुधारों से अभी और आर्थिक लाभ मिलने की गुंजाइश देखना है। यानी भारत को ग्रोथ बनाए रखने के लिए सिर्फ नए रिफॉर्म पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है, बल्कि पुराने पुराने सुधारों का बेहतर क्रियान्वयन भी इकोनॉमी को आगे ले जा सकता है। यह फॉर्मलाइजेशन, बेहतर टैक्स कंप्लायंस और डिजिटल इन्फ्रा जैसे बदलावों के जरिए इकोनॉमी के बड़े हिस्से को व्यवस्थित तंत्र में ला सकता है।

महंगा क्रूड बना सकता है रुकावट

भारत की कंज्यूमर ड्रिवन ग्रोथ को लेकर KKR ने मजबूत बताया है। इसके अलावा बढ़ती आय और बढ़ती खपत को लंबे समय के लिए इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर माना है। लेकिन, Crude Oil Prices के करीब $100 प्रति बैरल के स्तर पर बने रहने को शॉर्ट टर्म में दबाव बढ़ाने वाला माना है। इसके साथ ही लेकिन KKR का कहना है कि इस बार सरकार की नीतियों के चलते महंगे क्रूड का पूरा असर आम लोगों के जेब तक पूरी तरह नहीं पहुंचा है। इसकी वजह से इस बार ऑयल प्राइस शॉक का असर पिछली घटनाओं की तुलना में कम रह सकता है।

सेवा क्षेत्र और GCC बनेंगे ग्रोथ के नए इंजन

भारत की अगली ग्रोथ स्टोरी में सेवा निर्यात की भूमिका और बड़ी हो सकती है। KKR के मुताबिक ग्लोबल कैपिबिलिटी सेंटर्स (GCCs) अब ट्रैडिशनल IT सेवाओं से आगे निकलकर ग्रोथ के लिए अहम पिलर बनते जा रहे हैं। भारत के रियल GDP ग्रोथ में सेवाओं का योगदान पहले ही आधे से ज्यादा है। ऐसे में ग्लोबल बिजनेस के लिए भारत का इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, एनालिटिक्स और हाई वैल्यू कॉरपोरेट फंक्शन का हब बनना इकोनॉमी को नई गति दे सकता है।

भारत के लिए AI खतरा नहीं, ग्रोथ ड्राइवर

Artificial Intelligence यानी AI को लेकर जहां IT इंडस्ट्री में नौकरियों को लेकर चिंता है। वहीं, KKR का नजरिया इसे लेकर अलग है। रिपोर्ट के मुताबिक KKR को उम्मीद है कि भारतीय IT कंपनियां AI को अपने सर्विस डेलीवरी सिस्टम में तेजी से शामिल करेंगी। इससे AI केवल पारंपरिक IT सेवाओं को डिसरप्ट करने वाली टेक्नोलॉजी नहीं रहेगा, बल्कि भारत की ग्रोथ अगला बड़ा इंजन बन सकता है। यानी आने वाले वर्षों में भारतीय कंपनियां कम वैल्यू वाले रूटीन कामों से आगे बढ़कर AI पावर्ड , High-Value और अधिक Productive Services देने की स्थिति में आ सकती हैं।

भारत के लिए $8 ट्रिलियन का मतलब क्या?

अगर भारत 10-11% नॉमिरनल GDP ग्रोथ के आसपास बना रहता है, तो अगले दशक में इकोनॉमी का आकार दोगुना होने का दूसरा मतलब देश में नौकरियां और आय बढ़ना भी है। क्योंकि, Economy बढ़ने का मतलब सिर्फ GDP का बड़ा आंकड़ा नहीं होता। बल्कि, इसके साथ ही ज्यादा नौकरियां, ज्यादा अवसर और बेहतर सैलरी भी होता है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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