Edible Oil Import Duty: भारत सरकार ने खाद्य तेल (Edible Oil) पर आयात शुल्क (Import Duty) को एक साल तक और कम रखने का फैसला किया है। सरकार मार्च 2025 तक खाद्य तेल पर आयात शुल्क कम रखेगी। बता दें कि खाद्य तेलों में कच्चे पाम तेल, कच्चे सूरजमुखी तेल और कच्चे सोया तेल पर कम आयात शुल्क की समयसीमा इस साल मार्च में समाप्त होने वाली थी। मगर फिलहाल इसे एक और साल के लिए बढ़ा दिया गया है। बता दें कि भारत विश्व में वनस्पति तेल का सबसे बड़ा आयातक है। पिछले साल जून में रिफाइंड सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क 17.5% से घटाकर 12.5% कर दिया गया था। भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम तेल मंगाता है। वहीं अर्जेंटीना से सोयाबीन के अलावा थोड़ा कच्चा नरम तेल भी आयात किया जाता है। वहीं भारत में सूरजमुखी तेल यूक्रेन और रूस से आयात किया जाता है।
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क्यों कम रखा गया आयात शुल्क
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार वनस्पति तेल ब्रोकरेज कंपनी सनविन ग्रुप के सीईओ संदीप बाजोरिया के अनुसार ऐसे किसी फैसले की पहले से ही उम्मीद थी, क्योंकि सरकार चुनाव से पहले कीमतों (खाद्य तेल की कीमतों) को कंट्रोल में रखना चाहती है।
शीरे पर लगा निर्यात शुल्क
सरकार ने 18 जनवरी से शराब उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होने वाले गन्ने के सब-प्रोडक्ट शीरा (Molasses) के निर्यात पर 50% शुल्क लगाया है। वित्त मंत्रालय की एक अधिसूचना में कहा गया है कि चीनी के निष्कर्षण या शोधन से बने शीरे पर 50% निर्यात शुल्क लगेगा।
शुक्रवार को जारी इंडस्ट्री डेटा के अनुसार, कच्चे और रिफाइंड पाम तेल के शिपमेंट में कमी के नतीजे में दिसंबर में भारत का खाद्य तेल आयात सालाना आधार पर 16 प्रतिशत गिरकर 13.07 लाख टन रह गया।
