भारत में सोने का रिश्ता सिर्फ पैसे से नहीं, बल्कि भावनाओं से भी जुड़ा है। हर घर में सोना कभी न कभी जरूर खरीदा जाता है कभी शादी के लिए, कभी बचत के लिए और कभी सिर्फ शुभता के लिए। लेकिन अब समय बदल रहा है। पहले लोग सोने की दुकान जाकर सोना खरीदते थे, पर अब मोबाइल ऐप से भी सोना खरीदा जा रहा है। Paytm, PhonePe और Groww जैसे ऐप अब सिर्फ ₹10 में भी 24 कैरेट सोना खरीदने की सुविधा देते हैं। त्योहारों के समय जब सोने के दाम ₹13,000 प्रति ग्राम के ऊपर चले गए हैं, तो कई लोग सोच रहे हैं क्या डिजिटल गोल्ड लेना सही है या फिर असली सोना ही बेहतर है? तो आइए बताते हैं आपके लिए क्या बेहतर है?
डिजिटल गोल्ड के फायदे
डिजिटल गोल्ड ऐसा सोना है जिसे आप ऑनलाइन खरीदते हैं, लेकिन वह असली रूप में किसी सुरक्षित वॉल्ट में रखा रहता है। इसे MMTC-PAMP और SafeGold जैसी कंपनियां संभालती हैं। मतलब सोना आपका है, बस आपके घर में नहीं, बल्कि सिक्योर लॉकर में रखा होता है। आप इसे धीरे-धीरे खरीद सकते हैं, बेच सकते हैं और पैसे तुरंत बैंक में आ जाते हैं।
फिजिकल गोल्ड के नुकसान
दूसरी तरफ, हम भारतीय अभी भी गहनों के रूप में सोना रखना पसंद करते हैं। क्योंकि असली सोना हाथ में होता है, दिखता है और जरूरत पर काम आता है। लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं मेकिंग चार्ज लगता है, शुद्धता की टेंशन रहती है और चोरी का डर भी होता है। बेचने पर भी कई बार वजन और डिजाइन कट हो जाती है।
डिजिटल या फिजिकल सोना क्या है बेहतर?
डिजिटल गोल्ड की सबसे बड़ी खासियत है सुविधा और तुरंत पैसे मिलने की सुविधा। लेकिन इसमें निवेश की लिमिट रहती है और यह अभी तक RBI या SEBI के नियमों के तहत नहीं आता, जिससे बड़े निवेशकों को थोड़ी चिंता रहती है। वहीं, असली सोना सुरक्षित महसूस होता है क्योंकि वह आपके हाथ में होता है।
टैक्स के मामले में दोनों बराबर हैं। तीन साल से पहले बेचेंगे तो टैक्स आपकी आमदनी के हिसाब से लगेगा और तीन साल बाद बेचने पर 20% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। अगर बिना टैक्स वाला गोल्ड ऑप्शन चाहिए तो Sovereign Gold Bond (SGB) सबसे अच्छा विकल्प है, क्योंकि इसकी मैच्योरिटी पर कोई टैक्स नहीं लगता।
