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SIP निवेश पर चाहिए बंपर रिटर्न, कम से कम इतने साल तक रेगुलर सिप करें

दरअसल, SIP कंपाउंडिंग के नियम पर काम करती है। यानी जितना लंबा समय आप निवेश में देंगे, उतना ही ज्यादा फायदा मिलेगा। अगर आप सिर्फ 3 से 5 साल के लिए SIP करते हैं, तो रिटर्न ठीक-ठाक मिल सकता है, लेकिन बंपर रिटर्न पाने के लिए कम से कम 10 से 15 साल तक लगातार SIP करना जरूरी है।

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SIP Investment

अगर आप म्यूचुअल फंड में SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए निवेश कर रहे हैं, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि अच्छा रिटर्न पाने के लिए कितने समय तक लगातार निवेश करना चाहिए। अक्सर निवेशक जल्दी-जल्दी बड़ा मुनाफा कमाने की सोच में सिप को बीच में ही बंद कर देते हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि SIP का असली फायदा तभी मिलता है जब आप लंबे समय तक रेगुलर निवेश करते हैं।

दरअसल, SIP कंपाउंडिंग के नियम पर काम करती है। यानी जितना लंबा समय आप निवेश में देंगे, उतना ही ज्यादा फायदा मिलेगा। अगर आप सिर्फ 3 से 5 साल के लिए SIP करते हैं, तो रिटर्न ठीक-ठाक मिल सकता है, लेकिन बंपर रिटर्न पाने के लिए कम से कम 10 से 15 साल तक लगातार SIP करना जरूरी है।

कितनी और कितने साल की करें SIP

मान लीजिए आप हर महीने ₹10,000 की SIP करते हैं और सालाना औसत 12% का रिटर्न मिलता है। 5 साल में यह राशि लगभग ₹8 लाख तक हो सकती है। लेकिन अगर आप वही SIP 15 साल तक करते हैं तो आपका कोरपस करीब ₹35 लाख से ज्यादा पहुंच सकता है। यानी, ज्यादा समय तक SIP करने से आपका रिटर्न कई गुना बढ़ जाता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अगर आप बड़ा फंड बनाना चाहते हैं जैसे रिटायरमेंट प्लानिंग, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने के लिए तो SIP को कम से कम 15 साल तक जरूर जारी रखें। बीच में रोकने से आपके लंबे समय के फायदे कम हो सकते हैं। यानी, SIP निवेश में धैर्य ही सबसे बड़ा हथियार है। जितना ज्यादा समय आप रेगुलर निवेश करेंगे, उतना ही बंपर रिटर्न मिलेगा।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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