Gold Loan : देश में सोने के बदले कर्ज यानी गोल्ड लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है। लोगों का इस विकल्प की ओर झुकाव बढ़ने और वित्तीय संस्थानों की बढ़ती दिलचस्पी के चलते आने वाले वर्षों में इस बाजार (Gold Loan Market) का आकार काफी बड़ा हो सकता है। घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) की नई रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2028 तक देश में गोल्ड लोन का कुल बकाया कारोबार बढ़कर करीब 30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। मार्च 2026 में यह आंकड़ा करीब 18 लाख करोड़ रुपये था। यानी दो वर्षों में इस सेक्टर में तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है।
NBFC की रफ्तार बैंकों से रहेगी ज्यादा
रिपोर्ट के मुताबिक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) आने वाले समय में गोल्ड लोन के कारोबार में बैंकों से भी तेज गति से आगे बढ़ सकती हैं। वित्त वर्ष 2027-28 के अंत तक कुल गोल्ड लोन बाजार में एनबीएफसी की हिस्सेदारी बढ़कर 23 फीसदी होने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 22 फीसदी थी। इक्रा का कहना है कि वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 के दौरान NBFC के गोल्ड लोन कारोबार में हर साल करीब 35% की वृद्धि हो सकती है। वहीं, इसी अवधि में बैंकों के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में करीब 30% की सालाना बढ़ोतरी रहने का अनुमान है। हालांकि, बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कंपनियों की कमाई पर कुछ दबाव भी पड़ सकता है।
पिछले दो वर्षों में भी रही मजबूत बढ़ोतरी
रिपोर्ट बताती है कि मार्च 2026 तक के पिछले दो वित्त वर्षों में गोल्ड लोन बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस दौरान कुल गोल्ड लोन में औसतन 38% सालाना की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें बैंकों का गोल्ड लोन कारोबार करीब 35% बढ़ा, जबकि एनबीएफसी ने 54% की तेज वृद्धि हासिल की। यह आंकड़े बताते हैं कि गोल्ड लोन अब तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और जरुरत पड़ने पर लोग अन्य प्रकार के कर्ज की तुलना में इसे अधिक सुरक्षित और आसान विकल्प मान रहे हैं।
नई कंपनियों की एंट्री से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
इक्रा रेटिंग्स के सेक्टर हेड आर श्रीनिवासन के अनुसार, कई नई वित्तीय कंपनियां और बड़ी एनबीएफसी गोल्ड लोन कारोबार में प्रवेश कर रही हैं। इसके अलावा, मौजूदा कंपनियां भी अपने शाखा नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं। इससे ग्राहकों तक पहुंच आसान होगी और इस क्षेत्र की वृद्धि को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि बिना गारंटी वाले व्यक्तिगत कर्ज पर हाल के समय में दबाव बढ़ा है। ऐसे माहौल में लोग और वित्तीय संस्थान दोनों ही गोल्ड लोन को अधिक सुरक्षित विकल्प के रूप में देख रहे हैं, जिससे इसकी मांग लगातार बनी हुई है।
खुदरा ग्राहकों से मिल रही सबसे ज्यादा मांग
रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड लोन की वृद्धि का सबसे बड़ा कारण खुदरा ग्राहकों की बढ़ती मांग है। एनबीएफसी आमतौर पर लोगों को घरेलू जरूरतों, शिक्षा, मेडिकल खर्च और छोटे कारोबार के लिए सोने के बदले कर्ज उपलब्ध कराती हैं। मार्च 2026 तक एनबीएफसी की गोल्ड लोन प्रबंधनाधीन संपत्तियां (AUM) करीब 4 लाख करोड़ रुपये थीं। दूसरी ओर, बैंकों में भी खुदरा गोल्ड लोन तेजी से बढ़ा है। कृषि और अन्य जरुरतों के लिए दिए जाने वाले गोल्ड लोन में भी करीब 25% की वृद्धि दर्ज की गई। एजेंसी का कहना है कि इस बढ़ोतरी की वजह केवल नए कर्ज नहीं हैं, बल्कि कई ऋणों का दोबारा वर्गीकरण भी रहा है।
सोने की बढ़ती कीमतें भी बड़ा कारण
इक्रा की रिपोर्ट में कहा गया है कि गोल्ड लोन बाजार की तेज वृद्धि के पीछे एक बड़ी वजह सोने की लगातार बढ़ती कीमतें भी हैं। जब सोने का मूल्य बढ़ता है, तो उसी मात्रा के सोने पर पहले की तुलना में ज्यादा कर्ज मिल जाता है। यही कारण है कि गोल्ड लोन का कुल आकार तेजी से बढ़ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि बाजार में गिरवी रखे जा रहे सोने की मात्रा में बहुत अधिक बढ़ोतरी नहीं हुई है। वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच बड़े कर्जदाताओं के गोल्ड लोन में करीब 24% की वृद्धि हुई, जबकि गिरवी रखे गए सोने की मात्रा केवल 3 से 4% ही बढ़ी। इसका मतलब है कि लोन का आकार मुख्य रूप से सोने की ऊंची कीमतों की वजह से बढ़ा है।
क्या है इसका मतलब?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सोने की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और ग्राहकों की मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले वर्षों में गोल्ड लोन भारतीय वित्तीय बाजार का सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट बन सकता है। बैंकों और एनबीएफसी के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से ग्राहकों को बेहतर सेवाएं और आसान कर्ज मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
