दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत एक चमकता सितारा बना हुआ है। अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पूरी दुनिया महंगाई और मंदी की चपेट में है। वहीं, भारत तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद तेज गति से लगातार आगे बढ़ रहा है। भारत के इस तेज ग्रोथ पर अब दुनिया की बड़ी रेटिंग एजेंसी फिच और S&P ने भी भरोसा जताया है। दोनो रेटिंग एजेंसियों ने भारत के GDP अनुमान को बढ़ा दिया है। पिछले सप्ताह एक अन्य वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया था। आइए समझते हैं कि ऐसा दोनों ने ऐसा क्यों किया है?
फिच ने वृद्धि का अनुमानबढ़ाकर 6.9% किया
फिच रेटिंग्स ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया।
रेटिंग एजेंसी ने अप्रैल- जून तिमाही में मजबूत आर्थिक वृद्धि और अर्थव्यवस्था की समग्र मजबूती का हवाला दिया। फिच के अनुसार, शेष वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि की गति धीमी पड़ने की संभावना है। इसके कारण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है।
फिच ने कहा कि अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है कि 2026 की पहली छमाही में व्यापार शर्तों में आई बड़ी गिरावट के बावजूद अमेरिकी-ईरान युद्ध से लगे झटके के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है।
फिच ने कहा कि निजी निवेश की संभावनाएं अधिक मजबूत दिख रही हैं और हमें उम्मीद है कि निवेश में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होगी। गैर-खाद्य ऋण की वृद्धि जुलाई में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत रही।
S&P ने जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7% किया
वित्तीय शोध और साख निर्धारित करने वाली एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया। रेटिंग एजेंसी ने इसके लिए मजबूत आर्थिक गतिविधियों का हवाला दिया और कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक वित्त वर्ष 2026-27 में नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की की बढ़ोतरी कर सकता है।
एसएंडपी ने 'इकोनॉमिक एक्टिविटी फॉर एशिया पैसिफिक’ शीर्षक से जारी अपनी रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 में उपभोक्ता मुद्रास्फीति के औसतन 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। भारत की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर 7.8 प्रतिशत रही।
रेपो रेट में बढ़ोतरी करेगा आरबीआई
फिच ने कहा कि मजबूत मांग, कीमतों में वृद्धि और प्रतिकूल आपूर्ति संबंधी घटनाक्रमों को देखते हुए हमारा अनुमान है कि आरबीआई इस साल अक्टूबर में दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.5 प्रतिशत कर देगा। इसके बाद 2027 की शुरुआत में इसमें और बढ़ोतरी कर 5.75 प्रतिशत किए जाने की उम्मीद है और फिर 2028 में दर घटकर 5.5 प्रतिशत पर आ सकती है।
एसएंडपी ने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि परिस्थितियों का संतुलन ऊंची ब्याज दरों की ओर जाएगा। इसके समर्थन में मजबूत आर्थिक वृद्धि, लगातार मुद्रास्फीति संबंधी दबाव, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और मौसम से जुड़े जोखिम जैसे कारक हैं। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि हमारा अनुमान है कि उपभोक्ता मुद्रास्फीति औसतन 5.1 प्रतिशत रहेगी और भारतीय रिजर्व बैंक चालू वित्त वर्ष में अपनी नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करेगा।
इस कारण तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था
एसएंडपी ने कहा कि मजबूत औद्योगिक गतिविधियों, स्वस्थ खपत, वस्तुओं के मजबूत निर्यात और सरकारी निवेश में तेजी जैसे कारकों ने आर्थिक वृद्धि को गति दी है। एसएंडपी ने कहा कि इसी कारण हमने 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान पहले के 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत किया गया है।ग्रोथ की राह में आगे चुनौतियां बढ़ेंगी
फिच ने कहा कि क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) सर्वेक्षण के आंकड़े विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों में विस्तार की रफ्तार धीमी होने का संकेत देते हैं। सामान्य से कम मानसूनी बारिश का असर कृषि और ग्रामीण मांग की वृद्धि पर पड़ेगा, जबकि बढ़ती मुद्रास्फीति से वास्तविक आय और उपभोक्ता गतिविधियां प्रभावित होंगी।
वहीं, एसएंडपी के अनुसार, वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में वृद्धि की रफ्तार कम हो सकती है, क्योंकि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को युक्तिसंगत बनाये जाने और आयकर में कटौती से मिलने वाला लाभ कम हो जाएगा। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि मौसम से जुड़े जोखिमों पर करीबी नजर रखने की जरूरत है। मौजूदा मानसून सत्र में नौ सितंबर, 2026 तक संचयी बारिश सामान्य से 15 प्रतिशत कम रही है। इसलिए कृषि उत्पादन और खाद्य मुद्रास्फीति महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं, जिन पर नजर रखनी होगी।
