भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया कि IBC के अंतर्गत आने से पहले ही दिसंबर 2024 तक, 13.78 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि से जुड़े 30,000 से अधिक मामलों का समाधान किया जा चुका है। यह स्थिति इस ओर इशारा करती है कि संहिता के प्रावधानों ने समय रहते संकट से निपटने के लिए देनदारों को सक्रिय किया है।
IBBI के कार्यकारी निदेशक जितेश जॉन ने जानकारी दी कि 30,310 मामलों को आधिकारिक रूप से दर्ज किए जाने से पहले ही निपटा लिया गया, जिनमें भारी वित्तीय चूक शामिल थी।
IBC की अहम भूमिका
जॉन ने यह भी कहा कि भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के पूर्वी क्षेत्र द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में यह तथ्य सामने आया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ‘भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति 2023-24’ रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों द्वारा 96,000 करोड़ रुपये की वसूली की गई, जिसमें से 46,000 करोड़ रुपये IBC प्रक्रिया के जरिए आए।
CIRP मामलों में 3.89 लाख करोड़ रुपये की वसूली
मार्च 2025 तक 1,194 कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रियाएं (CIRP) सफलतापूर्वक पूरी की गईं, जिससे लेनदारों को कुल 3.89 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए। यह दावा किए गए कुल मूल्य का लगभग 32 प्रतिशत है। इन समाधान योजनाओं के जरिये लेनदारों ने अपने परिसमापन मूल्य का 170% और उचित मूल्य का 93.36% प्राप्त किया।
40% मामले बंद कंपनियों के थे, जो पुनर्जीवित हुए
जॉन ने बताया कि इन मामलों में से लगभग 40 प्रतिशत ऐसे थे, जिनमें कंपनियां पहले ही बंद हो चुकी थीं, लेकिन IBC की प्रक्रिया के जरिए पुनर्जीवित की गईं। इससे न केवल आर्थिक वसूली हुई, बल्कि रोजगार सृजन में भी मदद मिली। इन मामलों में लेनदारों को उनके परिसमापन मूल्य का 150.33% और दावों का 18.96% तक वापस मिला।
