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PF से पैसा निकालने पर कितना लगेगा टैक्स? विड्रॉल से पहले तुरंत जान लें ये नए नियम

EPFO 3.0 के तहत पीएफ से पैसा निकालना अब बेहद आसान हो गया है, लेकिन टैक्स नियमों को जानना जरूरी है। 5 साल की नौकरी से पहले ₹50,000 से अधिक की निकासी पर 10% टीडीएस (TDS) लगता है, जो पैन न होने पर 30% तक हो सकता है।

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EPFO

नौकरीपेशा लोगों (Salaried Class) के लिए एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPFO) केवल एक बचत योजना नहीं, बल्कि उनके रिटायरमेंट के बाद का सबसे बड़ा वित्तीय सहारा होता है। अक्सर लोग नौकरी बदलने, घर बनाने, बच्चों की पढ़ाई या मेडिकल इमरजेंसी के समय अपने पीएफ खाते से पैसा निकालते हैं। हाल ही में सरकार द्वारा पेश किए गए EPFO 3.0 के तहत पीएफ से पैसा निकालने की प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा आसान, डिजिटल और तेज बना दिया गया है। ऑटो-सेटलमेंट की सीमा बढ़ने से लेकर एटीएम और यूपीआई (UPI) जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलने से अब मिनटों में पीएफ का पैसा निकाला जा सकता है। लेकिन इस तकनीकी आसानी के बीच, टैक्स से जुड़े नियमों को नजरअंदाज करना आपको भारी पड़ सकता है। पीएफ विथड्रॉल पूरी तरह टैक्स-फ्री नहीं होता; इस पर कब, कितना और किस शर्त पर टैक्स या टीडीएस (TDS) कटेगा, इसके कड़े नियम तय हैं। आइए जानते हैं पीएफ निकासी पर टैक्स का पूरा गणित।

कैसे चेक करें PF पर टैक्स लगेगा या नहीं?

पीएफ निकासी पर टैक्स लगेगा या नहीं, इसे तय करने वाला सबसे बड़ा पैमाना आपकी सर्विस की अवधि (Years of Service) है। इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक, यदि आप लगातार 5 साल की नौकरी पूरी करने के बाद अपने पीएफ खाते से कोई भी रकम निकालते हैं, तो वह निकासी पूरी तरह से टैक्स-फ्री (Tax-Free) होती है। इस 5 साल की अवधि की गणना आपके पहले नियोक्ता से शुरू होती है, और यदि आपने नौकरियां बदली हैं लेकिन अपना पीएफ बैलेंस नई कंपनी में ट्रांसफर कराया है, तो उन सभी नौकरियों के समय को एक साथ जोड़ा जाता है। इसलिए, लगातार 5 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद पैसा निकालने पर आपको ₹1 का भी टैक्स नहीं देना पड़ता।

कब लगता है टैक्स?

इसके विपरीत, यदि आप 5 साल की निरंतर सेवा पूरी करने से पहले (Premature Withdrawal) अपने पीएफ खाते से पैसा निकालते हैं, तो यह रकम टैक्स के दायरे में आ जाती है। लेकिन यहां भी छोटी राहत दी गई है; अगर आपकी निकाली जाने वाली कुल राशि ₹50,000 से कम है, तो उस पर कोई टीडीएस (TDS) नहीं काटा जाता। हालांकि, अगर आपकी नौकरी को 5 साल से कम समय हुआ है और आप ₹50,000 से अधिक की रकम निकाल रहे हैं, तो ईपीएफओ (EPFO) भुगतान करने से पहले ही सोर्स पर टैक्स यानी टीडीएस काट लेता है।

समय से पहले निकासी पर टीडीएस की दरें आपके पैन कार्ड (PAN Card) की उपलब्धता पर निर्भर करती हैं। अगर आपका पैन कार्ड आपके ईपीएफ खाते और यूएएन (UAN) से लिंक है, तो ₹50,000 से अधिक की निकासी पर 10% की दर से टीडीएस काटा जाता है। लेकिन यदि आपके खाते में पैन कार्ड अपडेट नहीं है, तो यह टीडीएस दर सीधे बढ़कर 30% (अधिकतम सीमा) तक पहुंच जाती है। इसलिए पीएफ विथड्रॉल के लिए अप्लाई करने से पहले हमेशा यह सुनिश्चित कर लें कि आपका केवाईसी (KYC) और पैन कार्ड पूरी तरह अपडेटेड हो।

कैसे बचाएं टैक्स?

क्या 5 साल से पहले पैसे निकालने पर टीडीएस से बचने का कोई कानूनी तरीका है? जी हां, इसके लिए सरकार ने फॉर्म 15G और फॉर्म 15H का प्रावधान रखा है। यदि 5 साल की सर्विस से पहले आपकी निकासी की रकम ₹50,000 से ज्यादा है, लेकिन आपकी कुल सालाना आय (पीएफ राशि मिलाकर) टैक्स छूट की सीमा से कम है, तो आप ऑनलाइन दावा करते समय फॉर्म 15G (वरिष्ठ नागरिकों के लिए फॉर्म 15H) भरकर सबमिट कर सकते हैं। इसे जमा करने के बाद बैंक या ईपीएफओ आपका टीडीएस नहीं काटेगा। इसके अलावा, यदि नौकरी छूटने की वजह कर्मचारी का खराब स्वास्थ्य हो, कंपनी का पूरी तरह बंद होना हो, या कोई ऐसा कारण हो जो कर्मचारी के नियंत्रण से बाहर था, तो 5 साल से पहले भी निकाली गई राशि पर टैक्स नहीं लगाया जाता।

नए EPFO 3.0 के नियमों के तहत, आपातकालीन स्थितियों में आप अपने पीएफ बैलेंस का एक बड़ा हिस्सा निकाल सकते हैं, लेकिन रिटायरमेंट फंड को सुरक्षित रखने के लिए कम से कम 25% बैलेंस खाते में बनाए रखना अनिवार्य किया गया है। अंत में ध्यान रखने वाली बात यह है कि यदि आपकी पीएफ निकासी टैक्स के दायरे में आती है, तो आपको इसे अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में 'Income from Other Sources' या 'Salaries' के तहत दिखाना होता है, जहां ईपीएफओ द्वारा काटे गए 10% टीडीएस को आपके कुल टैक्स दायित्व के खिलाफ एडजस्ट कर दिया जाता है। इसलिए, भविष्य में किसी भी वित्तीय नुकसान या आयकर विभाग के नोटिस से बचने के लिए, पीएफ का पैसा निकालने से पहले इन समय और राशि की सीमाओं को अच्छी तरह जांच लें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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