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कम उम्र से शुरू करें Retirement Saving, बुढ़ापे में पैसों की नहीं होगी टेंशन

रिटायरमेंट जीवन का वह दौर होता है तो व्यक्ति की मंथरी सैलरी आना बंद हो जाती है। ऐसे में रिटायरमेंट के बाद के जीवन में पैसों की तंगी न हो इसके लिए पर्याप्त पैसा होना बेहद जरूरी है।

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कम उम्र से ऐसे शुरू करें Retirement Saving (Photo: iStock)

रिटायरमेंट (Retirement) की प्लानिंग जितनी जल्दी शुरू की जाए, उतना ही बड़ा फंड तैयार करने में मदद मिलती है। 30 साल की उम्र रिटायरमेंट सेविंग शुरू करने के लिए एक अच्छा समय हो सकता है, क्योंकि इस उम्र में व्यक्ति के पास लंबे समय तक निवेश करने का मौका रहता है। इस उम्र में छोटी रकम से शुरुआत कर भी समय के साथ बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बनाया जा सकता है।

30 साल की उम्र में ऐसे शुरू करें रिटायरमेंट सेविंग

रिटायरमेंट की जरूरत का अनुमान

30 साल की उम्र में रिटायरमेंट सेविंग के लिए रिटायरमेंट की जरूरत का अनुमान लगाना होगा। यह सोचें कि आप किस उम्र में रिटायर होना चाहते हैं और रिटायरमेंट के बाद हर महीने कितने पैसों की जरूरत पड़ सकती है। महंगाई को भी ध्यान में रखें, क्योंकि आज के 30-40 हजार रुपये की जरूरत भविष्य में इससे काफी ज्यादा हो सकती है। इसके आधार पर आपको अपने रिटायरमेंट फंड का लक्ष्य तय करना चाहिए।

आय का एक हिस्सा रिटायरमेंट के लिए

इसके बाद अपनी आय का एक निश्चित हिस्सा रिटायरमेंट के लिए अलग करें। अगर अभी बड़ी रकम निवेश करना संभव नहीं है तो छोटी राशि से शुरुआत करें। उदाहरण के लिए हर महीने 5,000 या 10,000 रुपये की बचत कर निवेश शुरू किया जा सकता है। आय बढ़ने के साथ इस रकम को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।

अलग-अलग विकल्पों का इस्तेमाल

रिटायरमेंट के लिए निवेश करते समय केवल सेविंग अकाउंट में पैसा रखने के बजाय अलग-अलग विकल्पों को समझना जरूरी है। EPF, PPF, NPS और म्यूचुअल फंड SIP जैसे विकल्पों पर अपनी जरूरत, जोखिम लेने की क्षमता और निवेश की अवधि के अनुसार विचार किया जा सकता है। लंबी अवधि में इक्विटी आधारित निवेश में उतार-चढ़ाव का जोखिम रहता है, इसलिए निवेश चुनने से पहले उसके जोखिम को समझना जरूरी है।

रिटायरमेंट सेविंग की समीक्षा

इसके अलावा, हर साल अपनी रिटायरमेंट सेविंग की समीक्षा करें। अगर सैलरी बढ़ती है तो निवेश की रकम में भी बढ़ोतरी करें। उदाहरण के लिए हर साल SIP में 5-10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने से लंबे समय में निवेश की कुल राशि काफी बढ़ सकती है। बोनस या अतिरिक्त आय का कुछ हिस्सा भी रिटायरमेंट फंड में डाला जा सकता है।

इमरजेंसी फंड और बीमा भी जरूरी

रिटायरमेंट सेविंग के साथ इमरजेंसी फंड और बीमा को अलग रखना भी महत्वपूर्ण है। अचानक आने वाले खर्चों के लिए अगर अलग फंड मौजूद होगा, तो रिटायरमेंट निवेश को बीच में निकालने की जरूरत कम होगी। सबसे जरूरी बात यह है कि रिटायरमेंट सेविंग को टालें नहीं। 30 साल की उम्र में शुरू की गई छोटी बचत भी लंबे समय तक निवेश होने पर कंपाउंडिंग का फायदा उठा सकती है। इसलिए अपनी आय और खर्च के हिसाब से एक निश्चित रकम तय करें, नियमित निवेश करें और समय-समय पर अपने लक्ष्य की समीक्षा करते रहें।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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