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8th Pay Commission Pension: क्यों सिविलियन कर्मचारी मांग कर रहे हैं 'वन रैंक, वन पेंशन'?

8th Pay Commission Pension: 8वें वेतन आयोग में केंद्रीय सिविलियन कर्मचारी 'वन रैंक, वन पेंशन' (OROP) की मांग कर रहे हैं, जिससे विभिन्न वर्षों में रिटायर हुए समान पद के कर्मचारियों को समान पेंशन मिले।

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8वें वेतन आयोग से बड़ी उम्मीद

Photo : iStock

8th Pay Commission Pension : केन्द्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वां वेतन आयोग उम्मीदों की नई किरण लेकर आया है। आयोग द्वारा हितधारकों के साथ की जा रही चर्चाओं के बीच सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगी संगठनों ने 'वन रैंक, वन पेंशन' (OROP) की मांग को जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया है। फिलहाल यह सुविधा केवल रक्षा बलों (सशस्त्र सेनाओं), सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को ही मिलती है। अब सिविलियन पेंशनर्स संगठन भी चाहते हैं कि लेवल 1 से लेकर 18 तक के सभी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए भी OROP जैसी व्यवस्था लागू की जाए।

क्या है 'वन रैंक, वन पेंशन' (OROP) ?

'वन रैंक, वन पेंशन' का सीधा मतलब यह है कि एक ही पद या लेवल पर काम करके समान अवधि की सेवा देने वाले कर्मचारियों को एक जैसी पेंशन मिले, चाहे वे किसी भी साल में रिटायर हुए हों। मौजूदा समय में अलग-अलग वेतन आयोगों के तहत रिटायर होने के कारण, एक ही पद से रिटायर हुए दो अलग-अलग पेंशनभोगियों की पेंशन में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। सिविलियन कर्मचारी इस असमानता और अंतर को खत्म करने के लिए OROP की मांग कर रहे हैं।

अभी किन्हें मिलता है OROP का फायदा?

केंद्र सरकार ने सशस्त्र बलों के जवानों और अधिकारियों के लिए वर्ष 2015 में OROP की शुरुआत की थी, जिसे 1 जुलाई 2014 से लागू माना गया था। इसके अलावा, देश के शीर्ष न्यायालयों (सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय) के रिटायर जजों तथा सीएजी (CAG) को भी यह लाभ दिया जाता है। अब ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) जैसे प्रमुख कर्मचारी संगठन इस दायरे में सभी सिविलियन कर्मचारियों को भी शामिल कराना चाहते हैं।

पुराने वेतन आयोगों ने पेंशन समानता पर क्या कहा?

AIDEF के प्रतिनिधि सी श्रीकुमार के अनुसार, पेंशन की इस असमानता पर पहले के वेतन आयोगों में भी विचार हुआ है। 5वें वेतन आयोग ने 1986 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन में सुधार के लिए 'नोशनल फिक्सेशन' की सिफारिश की थी। वहीं, 7वें वेतन आयोग ने भी पुराने और नए पेंशनभोगियों के बीच की दूरी को धीरे-धीरे खत्म करने और पेंशन में समानता लाने की बात स्वीकार की थी।

कर्मचारी संगठनों का प्रस्ताव और गणना का आधार

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि नोशनल फिक्सेशन के जरिए पुराने पेंशनरों को नए वेतनमान के बराबर लाया जाना चाहिए। संगठन का सुझाव है कि रिटायरमेंट के बाद अगर किसी पद के स्केल में सुधार, अपग्रेडेशन या री-क्लासिफिकेशन होता है, तो उसका लाभ पुराने पेंशनभोगियों को भी मिलना चाहिए। OROP के तहत AIDEF ने सिफारिश की है कि किसी कर्मचारी की पेंशन उसके पद के हिसाब से तय वेतन के कम से कम 50% पर फिक्स की जानी चाहिए।

इसके लिए 8वें वेतन आयोग को रिटायरमेंट के समय का पद या लेवल, सेवा के दौरान मिले इंक्रीमेंट, प्रमोशन, और बाद में उस पद में हुए सुधारों को आधार बनाना चाहिए ताकि सभी को न्याय मिल सके।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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