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SEBI F&O: रिटेल निवेशकों पर SEBI के F&O में बदलाव से क्या पड़ेगा असर, जान लीजिए

  • Edited by: Rohit Ojha
  • Updated Jul 31, 2024, 01:30 PM IST

SEBI F&O: डेरिवेटिव में रिटेल सट्टेबाजी को रोकने के लिए प्रस्तावित सात कदमों में से सबसे अधिक प्रभाव वीकली ऑप्शन पर पड़ेगा। निवेशकों की संख्या में गिरावट के रूप में सबसे बड़ा झटका देखने को मिलेगा, क्योंकि डिस्काउंट ब्रोकर्स के लिए रिस्क अधिक होगा।

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SEBI F&O

SEBI F&O: बाजार नियामक सेबी के प्रस्तावित 7 फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) उपायों को अगर लागू किया जाता है, तो इससे एनएसई और बीएसई जैसे स्टॉक एक्सचेंजों पर भारी असर देखने को मिल सकता है। इससे मार्केट के वैल्यू में 30-40 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। बिजनेस टुडे में छपी खबर के अनुसार, आईआईएफएल सिक्योरिटीज ने कहा कि निवेशकों की संख्या में गिरावट के रूप में सबसे बड़ा झटका देखने को मिलेगा, क्योंकि डिस्काउंट ब्रोकर्स के लिए रिस्क अधिक होगा।

वीकली ऑप्शन पर पड़ेगा असर

डेरिवेटिव में रिटेल सट्टेबाजी को रोकने के लिए प्रस्तावित सात कदमों में से सबसे अधिक प्रभाव वीकली ऑप्शन पर पड़ेगा। सेबी ने प्रत्येक एक्सचेंज में केवल एक बेंचमार्क इंडेक्स का प्रस्ताव दिया है। इंडेक्स ऑप्शन कुल वॉल्यूम का 98 फीसदी है। कॉन्ट्रैक्ट साइज को 2-3 गुना बढ़ाने से छोटे रिटेल निवेशकों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी। हालांकि, आईआईएफएल सिक्योरिटीज का मानना है कि इससे वॉल्यूम की तुलना में निवेशकों की संख्या में अधिक गिरावट आ सकती है।

ईटी नाउ के एडिटर इन चीफ निकुंज डालमिया ने बुधवार को कहा कि सेबी ने केवल बदलाव का प्रस्ताव दिया है और यह अंतिम नहीं है। उन्होंने कहा कि यह एक कंसल्टेशन पेपर है और हमें देखना होगा कि इसमें से कितना लागू होता है।

रिटेल निवेशकों की बड़ी भागीदारी

उन्होंने कहा कि मार्केट में अभी भी ऑप्शन गतिविधि रिकॉर्ड हाई पर है और जिस तरह से कोविड के बाद ऑप्शन मार्केट में रिटेल भागीदारी देखी गई है, मुझे लगता है यह एक असाधारण उछाल है। यदि आप इंस्टीट्यूशनल निवेशकों को बाहर कर दें तो केवल 15 फीसदी नॉन इंस्टीट्यूशनल ग्राहकों ने ही पैसा कमाया है। लेकिन ऐसे मजबूत बुल मार्केट में तुरंत पैसा बनाने का लालच हमेशा बना रहता है। निकुंज डालमिया ने कहा क हमने रिटेल निवेशकों की बड़ी भागीदारी देखी, जो वित्तीय बाजारों में जोखिम की वास्तविकता को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहे हैं।

वीकली कॉन्ट्रैक्ट को कम करने और लॉट साइज बढ़ाने जैसे बदलाव करने से केवल यह पता चलेगा कि गंभीर ट्रेंडर्स भाग ले रहे हैं। इसलिए एक तरह से इसका असर होगा। अगर इसे स्पष्ट रूप से लागू किया जाता है, तो इसका वॉल्यूम पर असर होगा।

कम हो जाएगा ट्रेडिंग वॉल्यूम

उन्होंने कहा कि अगर यह सब लागू किया जाता है, तो निश्चित रूप से ट्रेडिंग वॉल्यूम कम हो जाएगा क्योंकि मार्जिन का अधिक भुगतान करना होगा। अगर आप लॉट खरीद रहे हैं, तो यह महंगा होगा। इसलिए भाग लेने के बजाय, आप कहेंगे कि इतना पैसा लॉट के लिए नहीं लगा सकता, जाहिर है कि इसका असर दिखेगा। इंस्टीट्यूशनल ब्रोकरेज को इससे अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि उनके लिए यह बुक मैनेजमेंट जैसा है। वे रिस्क को समझते हैं और उनके लिए यह ठीक है। लेकिन रिटेल ब्रोकरेज पर इसका असर होगा।

Rohit Ojha
Rohit Ojhaauthor

<p>रोहित ओझा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉरस्पॉडेंट सितंबर 2023 से काम कर रहे हैं। यहां पर वो बिजेनस और यूटिलिटी की खबरों पर काम करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में पांच साल से अधिक का अनुभव। चुनावी खबरों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर फिलहाल स्टॉक मार्केट, इकोनॉमी और पर्सनल फाइनेंस की खबरों के साथ जारी है। डेस्क और फील्ड दोनों में ही काम करने का तजुर्बा। टाइम्स नाऊ नवभारत से पहले अलग-अलग मीडिया संस्थानों में अलग-अलग बीट पर काम कर चुके हैं। अमर उजाला, टीवी9 हिंदी, इंडिया टीवी, आज तक जैसे मीडिया संस्थान में अलग-अलग बीट पर काम कर चुके हैं। स्टॉक मार्केट और इकोनॉमी के साथ-साथ देश की सियासी घटनाओं पर लिखने का अनुभव है। 2019 के आम चुनाव से लेकर तमाम विधानसभा की चुनावी खबरों पर काम किया है। 2019 का क्रिकेट वर्ल्ड कप और आईपीएल की खबरों पर भी काम किया है। किस्से-कहानियों में मन लगता है। शारदा यूनिवर्सिटी से मास-कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म किया है। गृह जनपद- बक्सर। साहित्य, सियासत और सिनेमा पर लिखना-पढ़ना खूब पसंद है।</p>

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