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अक्षय तृतीया पर सोना लेने का है प्लान तो जान लें 10 ग्राम की ज्वेलरी बनवाने पर सुनार वसूलता है कितना पैसा!

अगर आप भी Akshaya Tritiya पर सोना खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो पहले जान लीजिए आपके 10 ग्राम के गहने पर सुनार कितना चार्ज आपसे वसूलेगा?

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Akshaya Tritiya

अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) पर भारतीय परंपरा में इस दिन सोना (Gold) खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। महिलाएं अक्सर इस मौके पर नए गहने, खासकर 10 ग्राम (एक तोला) के नेकलेस या चूड़ियां बनवाती हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जब आप सुनार के पास जाते हैं, तो वह सोने के भाव के अलावा एक बड़ी रकम 'मेकिंग चार्जेस' के नाम पर जोड़ देता है? अक्सर लोग सोने का रेट तो देख लेते हैं, लेकिन ज्वेलरी की फाइनल कीमत कैसे तय होती है, इसमें गच्चा खा जाते हैं। आइए जानते हैं कि 10 ग्राम की ज्वेलरी पर आपसे कितनी जेब ढीली कराई जाती है।

कैसे तय होती है आपकी ज्वेलरी की फाइनल कीमत?

सोने के गहने खरीदते समय बिल केवल 'सोने के भाव' पर निर्भर नहीं होता। इसका एक सरल फॉर्मूला है:फाइनल कीमत = (सोने का रेट × वजन) + मेकिंग चार्जेस + वेस्टेज (यदि हो) + 3% GST

मेकिंग चार्जेस (Making Charges): यह वह मजदूरी या लेबर कॉस्ट है, जो सुनार कच्चे सोने को खूबसूरत गहने में ढालने के लिए लेता है। भारत में मेकिंग चार्जेस आमतौर पर सोने की कीमत का 6% से लेकर 25% तक हो सकते हैं। अगर आप मशीन से बनी साधारण चेन ले रहे हैं, तो यह कम (8-10%) होगा, लेकिन अगर आप हाथ से बना (Handmade) बारीक काम वाला नेकलेस ले रहे हैं, तो यह 20% या उससे ऊपर जा सकता है।

प्रति ग्राम बनाम प्रतिशत (Fixed vs Percentage): ज्वेलर दो तरह से पैसे वसूलते हैं। कुछ बड़े ब्रांड प्रति ग्राम के हिसाब से फिक्स रेट (जैसे ₹600 प्रति ग्राम) लेते हैं, जबकि कुछ कुल कीमत पर प्रतिशत जोड़ते हैं। उदाहरण के लिए, यदि सोने का भाव ₹75,000 प्रति 10 ग्राम है और मेकिंग चार्ज 12% है, तो आपको ₹9,000 सिर्फ मजदूरी के देने होंगे।

वेस्टेज चार्जेस (Wastage Charges) का खेल: गहने बनाते समय सोने को काटने, गलाने और जोड़ने में कुछ सोना 'बर्बाद' होता है, जिसे 'वेस्टेज' कहा जाता है। पुराने समय में यह 10-12% तक वसूला जाता था। हालांकि, अब आधुनिक मशीनों के कारण वेस्टेज कम होता है, फिर भी कई ज्वेलर्स मेकिंग चार्ज के साथ इसे अलग से जोड़ते हैं। खरीदारी करते समय हमेशा पूछें कि क्या मेकिंग चार्ज में वेस्टेज शामिल है या नहीं।

GST का झटका: सोने की शुद्ध कीमत और मेकिंग चार्जेस को जोड़ने के बाद जो 'सब-टोटल' बनता है, उस पर सरकार 3% GST वसूलती है। यानी आपकी मेकिंग जितनी ज्यादा होगी, आपका टैक्स भी उतना ही बढ़ जाएगा।

खरीदारी करते समय पैसे बचाने के 3 स्मार्ट टिप्स: मेकिंग चार्जेस पर मोलभाव (Bargaining): सोने के भाव फिक्स होते हैं, लेकिन मेकिंग चार्जेस पर ज्वेलर्स अक्सर डिस्काउंट देते हैं। अक्षय तृतीया जैसे त्योहारों पर कई शोरूम मेकिंग चार्जेस पर 25% से 50% तक की छूट देते हैं, इसका फायदा उठाएं।

हॉलमार्क जरूर देखें: हमेशा BIS हॉलमार्क वाली ज्वेलरी ही खरीदें। यह सुनिश्चित करता है कि आप जितने कैरेट (22K या 18K) का पैसा दे रहे हैं, आपको उतना ही शुद्ध सोना मिल रहा है।

ब्रेकअप बिल मांगें: बिल में सोने की कीमत, मेकिंग चार्ज, पत्थर की कीमत (यदि हो) और GST को अलग-अलग लिखवाएं। इससे पारदर्शिता बनी रहती है और भविष्य में गहना बेचते समय आसानी होती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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