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₹10 लाख सैलरी पर कितना हो Emergency Fund, AI ने बताया प्लान, नौकरी जाने की नो टेंशन

हर इंडस्ट्री और सेक्टर में कॉस्ट कटिंग और ले ऑफ चल रहे हैं। ऐसे में 10 लाख रुपये तक की सैलरी वाले लोग कितने रुपये का इमर्जेंसी फंड बनाएं, ताकि नौकरी जाने की ज्यादा टेंशन नहीं रहे।

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इमर्जेंसी फंड बनाना बेहद जरूरी

Emergency Fund AI Plan For ₹10 Lakh Salary : ग्लोबल मंदी की आहट के बीच हर तरफ छंटनी के बादल मंडरा रहे हैं। खासतौर पर टेक सेक्टर में उथल-पुथल मची है। ऐसे में अगर आपकी सालाना सैलरी 10 लाख रुपये के आसपास है, तो आपको कितना इमर्जेंसी फंड बनाना चाहिए, ताकि नौकरी जाने की स्थिति में जीवन कुछ दिनों तक सामान्य चल सके और और आप दूसरी नौकरी या विकल्प तलाश सके?

बड़ी चेतावनी देता है AI का जवाब

इस सवाल का जवाब ChatGPT ने बहुत कुशलता के साथ दिया है। हमने जब ये सवाल AI से पूछा गया तो उसका कैलकुलेशन लाखों सैलरीड प्रोफेशनल्स के लिए बड़ा वेक-अप कॉल बन गया। हमने AI से पूछा कि अगर सालाना सैलरी 10 लाख रुपये है, तो उसे कितना Emergency Fund बनाना चाहिए। AI ने इसे लेकर जो जवाब दिया, वो चौंकाने वाला है। क्योंकि, इसमें केवल सेविंग नहीं, बल्कि नौकरी जाने के बाद के सर्वाइवल का भी पूरा प्लान दिया गया है।

इन हैंड सैलरी के हिसाब से प्लान

AI के मुताबिक 10 लाख रुपये सालाना कमाने वाले व्यक्ति की इन-हैंड सैलरी टैक्स और PF कटने के बाद करीब 70,000 से 75,000 रुपये महीना बैठती है। ऐसे में अगर किसी का मासिक खर्च 40,000 से 50,000 रुपये है, तो उसे कम से कम 6 से 12 महीने का Emergency Fund जरूर बनाना चाहिए। ChatGPT की मानें तो 10 लाख सालाना वेतन वाले प्रोफेशनल्स के पास कम से कम 3 लाख से 6 लाख रुपये कैश Emergency Fund होना चाहिए। इसके साथ ही अगर व्यक्ति शादीशुदा है, होम लोन या बच्चों की जिम्मेदारी है, तो यह रकम 8 लाख रुपये तक होनी चाहिए।

नई नौकरी आसान नहीं

ChatGPT ने एक और कड़वी हकीकत से भी रूबरू कराते हुए कहा है कि मौजूदा जॉब मार्केट पहले जैसा नहीं रहा। पहले जहां नई नौकरी मिलने में 1-2 महीने लगते थे, अब कई प्रोफेशनल्स को 6 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में केवल SIP और लॉन्ग टर्म निवेश पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। लिहाजा, कम से कम 6 महीने का इमर्जेंसी फंड बनाना जरूरी है।

इमर्जेंसी फंड बचत नहीं

AI ने Emergency Fund को निवेश से पूरी तरह अलग रखने की सलाह दी है। इसका मतलब यह पैसा शेयर बाजार, क्रिप्टो या हाई रिस्क एसेट में नहीं, बल्कि सेविंग अकाउंट में या फिर ऐसे लिक्विड फंड या FD में होना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके।

मासिक इन-हैंड सैलरी (₹75,000 मानकर)खर्च/बचत का प्रकारहर महीने कितनी रकम रखें
घर और जरूरी खर्चकिराया, राशन, बिजली, यात्रा आदि₹30,000
EMI और लोनहोम लोन, कार लोन, क्रेडिट कार्ड EMI₹10,000
इमरजेंसी फंडनौकरी जाने या संकट के समय के लिए बचत₹12,000
निवेशSIP, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार, NPS₹10,000
बीमाहेल्थ और टर्म इंश्योरेंस₹3,000
लाइफस्टाइल खर्चघूमना, शॉपिंग, OTT, बाहर खाना₹5,000
स्किल डेवलपमेंटकोर्स, नई स्किल और सर्टिफिकेशन₹2,000
अतिरिक्त कैश बैकअपअचानक आने वाले छोटे खर्च₹3,000

क्यों नहीं बना पाते इमर्जेंसी फंड

बडे़ मेट्रो शहरों के बेहिसाब खर्चों की वजह से अक्सर अच्छी सैलरी के बावजूद लोग Emergency Fund नहीं बना पाए हैं। ज्यादातर लोगों की सैलरी EMI, महंगाई और लाइफस्टायल से जुड़े खर्चों में चली जाती है। ऐसे में आमतौर पर सैलरी बचत और इमर्जेंसी फंड बनाने तक के लिए बच ही नहीं पाती है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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