त्योहारों और शादी के सीजन में सोने के गहनों की खरीदारी बढ़ जाती है। ऐसे में अगर आप भी सोने की चेन, अंगूठी, कंगन या हार खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि ज्वेलर्स आपके बिल में किन-किन चीजों का पैसा जोड़ते हैं। अक्सर लोग मानते हैं कि गहने की कीमत उसके वजन और उस दिन के सोने के भाव से तय होती है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। फाइनल बिल में कई दूसरे चार्ज भी शामिल होते हैं।
कैसे तय होती है सोने के गहने की कीमत?
ज्वेलर्स सबसे पहले गहने में इस्तेमाल हुए सोने का वजन देखते हैं। इसके बाद उस दिन के सोने के भाव और उसकी शुद्धता के आधार पर कीमत निकाली जाती है। बाजार में 22 कैरेट, 18 कैरेट और 9 कैरेट जैसे अलग-अलग शुद्धता वाले सोने के गहने मिलते हैं। कैरेट जितना ज्यादा होगा, उसमें सोने की मात्रा उतनी ही अधिक होगी। उदाहरण के लिए, 22 कैरेट सोने की शुद्धता का फैक्टर 0.916 और 18 कैरेट का 0.75 होता है।
इसके बाद मेकिंग चार्ज जोड़ा जाता है। यह गहने को डिजाइन करने और बनाने में लगी मेहनत का खर्च होता है। अलग-अलग ज्वेलर्स मेकिंग चार्ज प्रति ग्राम या सोने की कीमत के प्रतिशत के हिसाब से लेते हैं। इसी वजह से एक जैसे गहने की कीमत अलग-अलग दुकानों पर अलग हो सकती है।
मेकिंग चार्ज के अलावा भी लगते हैं पैसे
गहने बनाते समय कुछ सोना बर्बाद होने की लागत को वेस्टेज चार्ज कहा जाता है। कुछ ज्वेलर्स इसे भी ग्राहक के बिल में जोड़ते हैं। अगर गहने में हीरे या दूसरे कीमती पत्थर लगे हैं, तो उनकी कीमत अलग से जोड़ी जाती है। इसके अलावा हॉलमार्किंग फीस और GST भी देना होता है। सोने की ज्वेलरी पर 3 फीसदी GST लगता है।
समझें कीमत निकालने का पूरा फॉर्मूला
आमतौर पर ज्वेलर्स इस फॉर्मूले से कीमत निकालते हैं:
कुल कीमत = [(सोने का शुद्ध वजन × उस दिन का भाव × शुद्धता) + मेकिंग चार्ज + वेस्टेज] × 1.03 + हॉलमार्किंग फीस।
उदाहरण के लिए, अगर 11 ग्राम की चेन में सोने का भाव ₹10,000 प्रति ग्राम है, तो सोने की कीमत ₹1.10 लाख होगी। इसमें ₹10,000 मेकिंग चार्ज जोड़ने पर रकम ₹1.20 लाख हो जाएगी। इस पर 3 फीसदी GST लगाने के बाद कीमत ₹1,23,600 होगी। इसमें हॉलमार्किंग फीस अलग से जुड़ सकती है। यह केवल समझाने के लिए दिया गया उदाहरण है।
गहने खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
ज्वेलरी खरीदने से पहले दुकानदार से पूरा बिल जरूर मांगें। बिल में सोने का वजन, शुद्धता, उस दिन का भाव, मेकिंग चार्ज, वेस्टेज, पत्थरों की कीमत और GST अलग-अलग लिखा होना चाहिए। अगर गहने में हीरे लगे हैं, तो उनकी ग्रेडिंग का सर्टिफिकेट भी मांगें। साथ ही पुराने सोने को बदलने या वापस बेचने की शर्तें पहले ही समझ लें। गहने पर BIS हॉलमार्क और HUID नंबर जरूर जांचें। इससे आपको पता रहेगा कि आप किस चीज के लिए कितना पैसा दे रहे हैं और खरीदारी में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
