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छुट्टी के दिन बैंक बंद रहते हैं फिर ATM में कहां से आते हैं नोट? जानें कौन डालता है इसमें पैसे

क्या आपने कभी सोचा है कि बैंक बंद होने के बावजूद एटीएम में नोटों की कमी क्यों नहीं होती? अगर नहीं तो आइए बताते हैं कौन ATM में पैसे जमा करता है और कैसे काम करता है ये सिस्टम?

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ATM

बैंक पिछले तीन दिनों से पूरी तरह बंद हैं और आपको अचानक कैश की सख्त जरूरत पड़ती है। आप अपने पास के एटीएम पर जाते हैं, कार्ड स्वाइप करते हैं और मशीन से कड़कड़ाते नोट बाहर आ जाते हैं। क्या आपने कभी गौर किया है कि जब बैंक का एक भी कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं है, तो ये नोट एटीएम के अंदर आखिर आए कहां से? क्या बैंक वाले छुट्टी पर जाने से पहले मशीन में इतना पैसा भर देते हैं कि वह कई दिनों तक खत्म ही न हो? अक्सर लोग समझते हैं कि एटीएम (ATM) में पैसे डालने की जिम्मेदारी उसी बैंक के कर्मचारियों की होती है, जिसकी वह मशीन है। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। बैंक और एटीएम का संचालन दो अलग-अलग प्रणालियों के तहत होता है। बैंक शाखाएं (Branches) जहां सार्वजनिक छुट्टियों या रविवार (Bank Holiday) को बंद रहती हैं, वहीं एटीएम नेटवर्क को 24x7 चालू रखने के लिए एक विशेष 'कैश मैनेजमेंट' सिस्टम काम करता है। यही कारण है कि बैंक बंद होने के बावजूद आपको अपनी नजदीकी मशीन में कैश की कमी महसूस नहीं होती।

कौन डालता है एटीएम में पैसे?

ज्यादातर बैंक एटीएम में कैश लोडिंग का काम खुद न करके इसे 'थर्ड-पार्टी कैश मैनेजमेंट कंपनियों' (CMS) को आउटसोर्स कर देते हैं। भारत में सीएमएस इन्फो सिस्टम्स, सिस्को (SISCO) और ब्रिंक्स जैसी कई बड़ी कंपनियां हैं जो इस काम को संभालती हैं। इन कंपनियों के पास भारी सुरक्षा वाले हथियारों से लैस गार्ड्स और विशेष कैश वैन होती हैं। जब भी किसी एटीएम में पैसा कम होता है, ये एजेंसियां सीधे 'करेंसी चेस्ट' (जहां आरबीआई का पैसा जमा होता है) से कैश लेती हैं और उसे मशीनों तक पहुंचाती हैं। ये निजी एजेंसियां हैं, इसलिए ये बैंक की छुट्टियों के दिन भी काम करती हैं।

कैसे पता चलता है कि पैसा खत्म हो गया?

एटीएम के अंदर एक हाई-टेक सेंसर और सॉफ्टवेयर सिस्टम लगा होता है जो बैंक के सर्वर से जुड़ा रहता है। इसे 'रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम' कहते हैं। जैसे ही किसी एटीएम में कैश का स्तर एक तय सीमा से नीचे गिरता है, बैंक के कंट्रोल रूम और संबंधित कैश मैनेजमेंट कंपनी को एक ऑटोमैटिक अलर्ट चला जाता है। इस अलर्ट के मिलते ही कंपनी अपनी वैन भेजकर मशीन को फिर से रिफिल (Refill) कर देती है। यह सब कुछ इतनी तेजी से होता है कि ग्राहक को पता भी नहीं चलता कि मशीन कब खाली हुई और कब उसे दोबारा भरा गया।

कैश की सुरक्षा और लोडिंग की प्रक्रिया

एटीएम में पैसा डालना एक बहुत ही सुरक्षित और जटिल प्रक्रिया है। जब कैश वैन एटीएम पहुंचती है, तो गार्ड चारों तरफ सुरक्षा घेरा बनाते हैं। इसके बाद, डिजिटल पासवर्ड और विशेष चाबियों का उपयोग करके मशीन का चेस्ट (तिजोरी) खोला जाता है। एटीएम के अंदर अलग-अलग मूल्य के नोटों (₹100, ₹200, ₹500) के लिए अलग-अलग 'कैसेट्स' (Cassettes) होते हैं। पुराने खाली कैसेट्स को निकालकर नए भरे हुए कैसेट्स लगाए जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया की रीयल-टाइम रिपोर्टिंग बैंक को भेजी जाती है ताकि हिसाब में एक रुपये की भी गड़बड़ी न हो।

त्योहारों और लंबी छुट्टियों की तैयारी

जब लगातार 3-4 दिनों तक बैंक बंद रहने वाले होते हैं (जैसे दिवाली या होली पर), तो बैंक और कैश एजेंसियां पहले से ही 'फोरकास्टिंग' यानी पूर्वानुमान लगा लेती हैं। आंकड़ों के आधार पर यह देखा जाता है कि किस इलाके के एटीएम से छुट्टियों में ज्यादा पैसा निकाला जा सकता है। ऐसे संवेदनशील एटीएम में छुट्टियों से ठीक एक दिन पहले अतिरिक्त कैश लोड कर दिया जाता है। इसके अलावा, बैकअप के तौर पर वैन को तैयार रखा जाता है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कैश पहुंचाया जा सके।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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