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Food Prices: घर में बना खाना हुआ महंगा, शाकाहारी-मांसाहारी थाली की कीमतों में बढ़ोतरी, ये है वजह

Food Prices: अगस्त में घर में बने खाने की कीमतों में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण टमाटर की कीमतों में तेज उछाल है। सोमवार को जारी क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति में कमी के चलते टमाटर की कीमतों में मासिक आधार पर 26% की बढ़ोतरी हुई, जिससे थाली की लागत बढ़ी।

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थोड़ा महंगा हुआ घर का खाना (तस्वीर-Canva)

Food Prices: अगस्त 2025 में घर पर बने खाने की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। क्रिसिल की मासिक रोटी-चावल रिपोर्ट के अनुसार, इस वृद्धि के पीछे प्रमुख कारण टमाटर की कीमतों में अचानक उछाल है। रिपोर्ट में बताया गया कि आपूर्ति में भारी कमी के चलते टमाटर की कीमतें मासिक आधार पर 26% तक बढ़ गईं।

शाकाहारी और मांसाहारी थाली की कीमतों में बढ़ोतरी

रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में एक शाकाहारी थाली की औसत कीमत 29.1 रुपये रही, जो जुलाई की तुलना में 4% अधिक है। जुलाई में यही कीमत 28.1 रुपये थी। वहीं, मांसाहारी थाली की कीमत 2% बढ़कर 54.6 रुपये प्रति प्लेट पहुंच गई, जबकि जुलाई में यह 53.5 रुपये थी।

आलू-प्याज की कीमतें रहीं स्थिर

टमाटर की बढ़ती कीमतों के बावजूद आलू और प्याज की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया। रिपोर्ट बताती है कि इन दोनों सब्जियों की कीमतें स्थिर बनी रहीं क्योंकि बाजार में स्टॉक से लगातार आपूर्ति बनी रही।

सालाना आधार पर राहत

हालांकि मासिक आधार पर कीमतों में इजाफा हुआ है, लेकिन सालाना तुलना करें तो तस्वीर कुछ राहत देने वाली है। अगस्त 2024 की तुलना में इस साल शाकाहारी भोजन करीब 7% सस्ता हुआ है, जबकि मांसाहारी थाली की कीमतों में 8% की गिरावट आई है।

वस्तुओं के दाम में नरमी बनी राहत का कारण

न्यूज एजेंसी भाषा ने क्रिसिल के अनुसार बताया कि सालाना आधार पर कीमतों में आई यह गिरावट खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई नरमी की वजह से संभव हो सकी है। इससे उपभोक्ताओं को कुछ हद तक राहत मिली है, खासकर उन लोगों को जो रोजाना घर का खाना खाते हैं।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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