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मुंबई-पुणे में घरों की बिक्री 17 प्रतिशत घटी, इस कारण लोग नहीं खरीद रहे प्रॉपर्टी

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मुंबई महानगरीय क्षेत्र (एमएमआर) और पुणे में जुलाई-सितंबर की अवधि में घरों की बिक्री 17 प्रतिशत घटकर 49,542 इकाई रह गई। प्रॉपइक्विटी की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रियल एस्टेट डाटा एनालिटिक्स कंपनी के मुताबिक, घरों की बिक्री में गिरावट मकानों की कीमतों में तेज उछाल और मांग में कमी की वजह से आई है। पिछले साल की समान अवधि में एमएमआर और पुणे में कुल 59,816 घरों की बिक्री हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, एमएमआर के ठाणे में घरों की बिक्री में सबसे ज्यादा 28 प्रतिशत की गिरावट आई और बिक्री घटकर 14,877 इकाई रह गई। एक साल पहले यहां 20,620 इकाइयों की बिक्री हुई थी।

मुंबई शहर में बिक्री घटी

मुंबई शहर में बिक्री आठ प्रतिशत घटकर 9,691 इकाई रह गई जबकि नवी मुंबई में बिक्री छह प्रतिशत घटकर 7,212 इकाई पर आ गई।

पुणे में भी आवास बिक्री 16 प्रतिशत घटकर 17,762 इकाई रह गई जो पिछले साल की समान तिमाही में 21,066 इकाई थी। रियल एस्टेट संगठन क्रेडाई-एमसीएचआई ने घरों की बिक्री कम होने पर कहा कि सितंबर तिमाही में आई यह गिरावट चिंता का विषय नहीं है और त्योहारों में मांग बढ़ने की संभावना है। क्रेडाई-एमसीएचआई के अध्यक्ष सुखराज नाहर ने कहा कि सितंबर तिमाही में बाजार के पुनर्संतुलन का दौर देखा गया। एमएमआर और पुणे में आवास की मांग बेहद मजबूत है। मेट्रो कॉरिडोर, कोस्टल रोड और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं लंबे समय तक बाजार को सहारा देंगी।

देश के अन्य शहरों में गिरी मांग

उन्होंने कहा कि कई उप-बाजारों में बिक्री अब भी नयी परियोजनाओं से अधिक है, जो स्वस्थ समायोजन को दर्शाती है। प्रॉपइक्विटी के मुताबिक, देश के शीर्ष नौ शहरों में आवासीय बिक्री जुलाई-सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर चार प्रतिशत और तिमाही आधार पर एक प्रतिशत घटकर 1,00,370 इकाई रही।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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