देश में इलाज का खर्च तेजी से बढ़ा है। इसके चलते हेल्थ इंश्योरेंस लेने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वहीं, कोरोना महामारी के बाद हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम साल दर साल तेजी से बढ़ा है। अब एक बार फिर से कंपनियां प्रीमियम में 15% तक की बड़ी बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रही हैं। इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, भारत में हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम अगले 12-18 महीनों में 15% तक बढ़ सकते हैं, क्योंकि इंश्योरेंस कंपनियां बढ़ती मेडिकल महंगाई और बदलते रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से अपनी कीमतें एडजस्ट कर रही हैं। यह बढ़ोतरी धीरे-धीरे होने और रिन्यूअल के समय लागू होने की संभावना है, लेकिन कीमतों के बढ़ने का ट्रेंड पक्का है।
जीएसटी जीरो करने का भी नहीं मिला फायदा
Health Insurance प्रीमियम का बोझ आम आदमी पर तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि कंपनियां इसमें साल दर साल लगातार इजाफा कर रही है। सरकार ने आम लोगों पर प्रीमियम का बोझ कम करने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी की दर जीरो कर दिया था लेकिन इसका भी फायदा नहीं मिला। इंश्योरेंस कंपनियों ने हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम में कोई खास कटौती नहीं की। अब एक बार फिर से प्रीमियम बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
Health Insurance Premium Hike के पीछे कंपनियों का क्या है तर्क?
हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम बढ़ाने के पीछे कंपननियों का तर्क है कि हर साल मेडिकल महंगाई तेजी से बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि यह सालाना 14–15% की दर से बढ़ रही है, जो कि आम महंगाई दर से काफी ज्यादा है। कंपनियों का कहना है कि अस्पतालों के बढ़ते शुल्क, आधुनिक इलाज और जांच-पड़ताल के बढ़ते इस्तेमाल और महामारी के बाद क्लेम की संख्या में हुई बढ़ोतरी के बाद प्रीमियम बढ़ाना मजबूरी है।
इसके अलावा सीनियर सिटिजन की आबादी में तेजी से हो रही बढ़ोतरी, दिल की बीमारियों और कैंसर जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामले, डॉक्टरों की फीस और सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में कमियों के कारण निजी स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता, इंश्योरेंस कंपनियों पर बोझ बढ़ा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, क्लेम रेश्यो 90% से ज्यादा हो गया है, जिससे इंश्योरेंस कंपनियों के मुनाफे पर काफी दबाव पड़ रहा है और प्रीमियम बढ़ाना जरूरी हो गया है।
आम लोगों पर कितना बढ़ा बोझ
इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, FY23 और FY25 के बीच व्यक्तिगत हेल्थ प्रीमियम में 23% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि फैमिली फ्लोटर पॉलिसी की औसत लागत 2021 में लगभग ₹15,000 से बढ़कर 2025 में ₹22,000 से ज्यादा हो गई है जो लगभग 46% की बढ़ोतरी है। एक्सपर्ट का कहना है कि लोग कम बीमा राशि (sum insured), ज्यादा डिडक्टिबल चुनकर प्रीमियम बोझ को कम कर सकते हैं।
