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HAL फिर बना रहा आसमान का 'बाहुबली', ₹60000 करोड़ से ज्यादा की प्लानिंग; कांप उठेगा पाकिस्तान!

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड नासिक में Su-30MKI फाइटर जेट का प्रोडक्शन फिर शुरू करने जा रही है। 2027-28 से नए विमान मिलने शुरू होंगे। इसके साथ ही वायुसेना के मौजूदा Su-30MKI बेड़े करीब ₹60,000 करोड़ में अपग्रेड करने की तैयारी है।

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12 नए जेट के साथ ही पुराने जेट होंगे अपग्रेड

HAL Su-30MKI : भारत का सबसे भरोसेमंद और ताकतवर फाइटर जेट Su-30MKI एक बार फिर नए अवतार में आसमान पर राज करने की तैयारी में है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL नासिक में Su-30MKI का प्रोडक्शन दोबारा शुरू करने जा रही है। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना के मौजूदा Su-30MKI बेड़े को अपग्रेड करने की करीब ₹60,000 करोड़ की बड़ी योजना पर भी काम चल रहा है।

HAL को भारतीय वायुसेना के लिए 12 नए Su-30MKI बनाने का ऑर्डर पहले ही मिल चुका है। करीब ₹11,000 करोड़ के इस ऑर्डर के तहत बनाए जाने वाले विमानों की डिलीवरी 2027-28 से शुरू होने की उम्मीद है। इन नए विमानों में 50 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट होगा। इन 12 विमानों को उन Su-30MKI की भरपाई के लिए शामिल किया जा रहा है, जिन्हें अलग-अलग हादसों में भारतीय वायुसेना ने खोया है।

₹60,000 करोड़ का अपग्रेड गेम चेंजर

HAL और Su-30MKI की इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा हिस्सा सिर्फ 12 नए फाइटर जेट नहीं हैं। बड़ा प्लान भारतीय वायुसेना के मौजूदा Su-30MKI बेड़े को अपग्रेड करने का है। इस अपग्रेड प्रोग्राम की अनुमानित लागत करीब ₹60,000 करोड़हो सकती है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है, तो बड़ी संख्या में भारतीय वायुसेना के Su-30MKI फाइटर जेट को नई पीढ़ी की तकनीक से लैस किया जा सकेगा। इस काम में HAL के साथ रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO की भी भूमिका हो सकती है। इसके अलावा कई प्रमुख सिस्टम और कंपोनेंट निजी क्षेत्र की भारतीय कंपनियों से लिए जाने की संभावना है। इसका मतलब सिर्फ वायुसेना की ताकत बढ़ना नहीं है। इतने बड़े प्रोग्राम से देश की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को भी बड़ा ऑर्डर मिल सकता है।

दो चरणों में बदलेगा Su-30MKI

ET की रिपोर्ट के मुताबिक Su-30MKI के बड़े अपग्रेड को दो चरणों में किए जाने की संभावना है। पहले चरण में विमान के एवियोनिक्स और रडार सिस्टम को आधुनिक बनाया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम पर काम किया जाएगा। सबसे अहम बदलाव नए रडार का हो सकता है। प्रस्तावित स्वदेशी रडार की मदद से Su-30MKI पहले के मुकाबले ज्यादा दूरी से दुश्मन के टारगेट को खोजने और उन पर हमला करने में सक्षम हो सकेगा। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पुराने Su-30MKI में इस्तेमाल होने वाले रडार की क्षमता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। नए रडार के आने से विमान की सिचुएशनल अवेयरनेस और लॉन्ग रेंज एंगेजमेंट क्षमता में बड़ा सुधार हो सकता है।

दुश्मन की मिसाइल को भी कर सकेगा जैम

नए रडार के अलावा Su-30MKI को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से भी लैस किए जाने की योजना है। यह सिस्टम दुश्मन के रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को पहचानने और जरूरत पड़ने पर उन्हें जैम करने में मदद करेगा। यानी आने वाले समय में Su-30MKI सिर्फ भारी हथियारों से लैस फाइटर जेट नहीं रहेगा, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के लिहाज से भी ज्यादा सक्षम प्लेटफॉर्म बनेगा। इसके साथ ही विमानों में Infrared Search and Track यानी IRST सिस्टम भी लगाए जाने की संभावना है। यह सिस्टम विमान को इंफ्रारेड सिग्नेचर के आधार पर हवाई टारगेट को खोजने और ट्रैक करने में मदद करता है। इससे Su-30MKI की दुश्मन के विमानों को पहचानने और उनसे मुकाबला करने की क्षमता और मजबूत हो सकती है।

चीन-पाकिस्तान के सामने क्यों बढ़ेगी चुनौती?

Su-30MKI पहले से ही भारतीय वायुसेना के सबसे अहम फाइटर जेट्स में शामिल है। इसकी लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने की क्षमता, बड़ी मात्रा में हथियार ले जाने की क्षमता और अलग-अलग तरह के मिशन को अंजाम देने की क्षमता इसे वायुसेना के लिए बेहद अहम बनाती है। अब अगर इसके बड़े पैमाने पर अपग्रेड की योजना लागू होती है तो इसकी कॉम्बैट क्षमता में काफी सुधार हो सकता है।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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