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Pershing Square : 35 अरब डॉलर की कंपनी में सिर्फ 48 कर्मचारी, सफाईकर्मी भी करोड़पति!

अरबपति निवेशक बिल ऐकमैन की पर्शिंग स्क्वायर में सिर्फ 48 कर्मचारी हैं। ऐकमैन के मुताबिक उनके सफाईकर्मी से रिसेप्शनिस्ट तक करोड़पति हैं। कंपनी करीब 35 अरब डॉलर की संपत्ति संभालती है।

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हेड फंड के सभी कर्मचारी करोड़पति

Pershing Square : अरबपति निवेशक बिल ऐकमैन की कंपनी पर्शिंग स्क्वायर इन दिनों अपने निवेश या किसी बड़े सौदे की वजह से नहीं, बल्कि अपने कर्मचारियों को लेकर चर्चा में है। करीब 35 अरब डॉलर की संपत्ति संभालने वाली इस हेज फंड कंपनी में सिर्फ 48 कर्मचारी हैं। खास बात यह है कि कंपनी के सफाईकर्मी और रिसेप्शनिस्ट जैसे कर्मचारियों के पास भी कंपनी के शेयरों की कीमत लाखों डॉलर में है। यानी यहां सिर्फ बॉस ही अरबपति नहीं है, बल्कि आम कर्मचारी भी करोड़ों रुपये की संपत्ति वाले हैं।

पर्शिंग स्क्वायर कैपिटल मैनेजमेंट के संस्थापक और अरबपति निवेशक बिल ऐकमैन (Bill Ackman) ने हाल ही में फॉर्च्यून के ‘टाइटन्स एंड डिसरप्टर्स ऑफ इंडस्ट्री’ पॉडकास्ट में कंपनी की इस नीति के बारे में बताया। ऐकमैन के मुताबिक, पर्शिंग स्क्वायर में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसके पास कंपनी के कई मिलियन डॉलर मूल्य के शेयर न हों। उन्होंने खास तौर पर सफाई करने वाले कर्मचारियों और फ्रंट डेस्क पर काम करने वाले लोगों का उदाहरण दिया।

सबके पास करोड़ों के शेयर

बिल ऐकमैन के मुताबिक पर्शिंग स्क्वायर में कंपनी की सफलता का फायदा सिर्फ बड़े अधिकारियों और निवेश टीम तक सीमित नहीं रखा जाता। उनका कहना है कि कंपनी में सफाई करने वाले कर्मचारी हों, रिसेप्शन पर काम करने वाले लोग हों या कोई दूसरा स्टाफ, सभी के पास कंपनी के कई मिलियन डॉलर मूल्य के शेयर हैं।भारतीय रुपये में देखें तो एक मिलियन डॉलर भी कई करोड़ रुपये के बराबर होता है। ऐसे में ऐकमैन का यह दावा सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है कि जिस कंपनी में कर्मचारी ऑफिस की सफाई या फ्रंट डेस्क जैसे काम करते हैं, वे भी करोड़ों रुपये की हिस्सेदारी रखते हैं। ऐकमैन का मानना है कि कर्मचारियों को कंपनी की सफलता में हिस्सेदार बनाने से उनमें यह भावना पैदा होती है कि कंपनी का प्रदर्शन सिर्फ मालिक या बड़े अधिकारियों के लिए मायने नहीं रखता, बल्कि उसका सीधा फायदा उन्हें भी मिलता है।

नौकरी बदलने की जरूरत ही नहीं

ऐकमैन के मुताबिक आज के दौर में कर्मचारियों को लंबे समय तक किसी कंपनी के साथ जोड़े रखना आसान नहीं है। बेहतर वेतन, करियर ग्रोथ और दूसरी कंपनियों के ऑफर की वजह से लोग नौकरी बदलते रहते हैं। लेकिन पर्शिंग स्क्वायर ने इसके लिए अलग तरीका अपनाया है। कंपनी कर्मचारियों को सिर्फ वेतन देने के बजाय उन्हें कंपनी के मालिकाना हक में हिस्सेदारी देती है। ऐकमैन का कहना है कि जब कर्मचारियों को लगता है कि वे कंपनी की सफलता में वास्तविक हिस्सेदार हैं और कंपनी भी उनका ध्यान रखती है, तो उनके लिए दूसरी जगह जाने की इच्छा कम हो जाती है। उनके अनुसार पर्शिंग स्क्वायर के 48 कर्मचारियों में अब तक एक भी ऐसी ‘अनचाही विदाई’ नहीं हुई, जिसे कंपनी रोकना चाहती थी।

छुट्टियों में भी खास सुविधा

कंपनी की कर्मचारी नीति सिर्फ शेयर देने तक सीमित नहीं है। ऐकमैन के मुताबिक पर्शिंग स्क्वायर में कर्मचारियों को सामान्य तौर पर सप्ताह में पांच दिन ऑफिस से काम करना होता है। हालांकि यह नियम साल के दस महीनों पर लागू होता है। जुलाई और अगस्त में कर्मचारियों को काफी ज्यादा लचीलापन दिया जाता है। इस दौरान निवेश टीम के कई सदस्य न्यूयॉर्क के बाहर हैम्पटन इलाके से साथ मिलकर काम करते हैं। यानी कंपनी एक तरफ ऑफिस में काम करने को लेकर सख्त है, तो दूसरी तरफ साल के कुछ महीनों में कर्मचारियों को काफी ज्यादा आजादी देती है।

खाना, जिम और हेल्थकेयर भी

पर्शिंग स्क्वायर की कर्मचारी सुविधाओं में स्वस्थ भोजन, जिम की सुविधा और व्यापक स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। ऐकमैन के मुताबिक कंपनी का लक्ष्य सिर्फ कर्मचारियों से ज्यादा से ज्यादा काम लेना नहीं है, बल्कि उन्हें कंपनी की सफलता का हिस्सा बनाना है। यही मॉडल पर्शिंग स्क्वायर को दूसरी वित्तीय कंपनियों से अलग बनाता है। आम तौर पर बड़ी निवेश कंपनियों में सबसे ज्यादा आर्थिक फायदा वरिष्ठ अधिकारियों और निवेश प्रबंधकों को मिलता है। लेकिन ऐकमैन के मुताबिक उनकी कंपनी में ऑफिस के सपोर्ट स्टाफ को भी कंपनी के शेयरों के जरिए संपत्ति बनाने का मौका मिलता है।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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