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H1B visa Layoffs: भारतीयों पर संकट! नौकरी गई तो 60 दिन में नई नौकरी ढूंढ लो, नहीं तो छोड़ना पड़ेगा अमेरिका

H1B visa Layoffs: अमेरिका में टेक कंपनियों की छंटनी से H-1B वीजा पर काम कर रहे भारतीयों पर संकट बढ़ा है। नौकरी जाने पर 60 दिन में नई नौकरी ढूंढनी या देश छोड़ना पड़ता है।

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अमेरिकी टेक कंपनियों में छंटनी से बढ़ी चिंता (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

H1B visa Layoffs : अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों में चल रही छंटनी ने भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स की चिंता बढ़ा दी है। मेटा, अमेजन और लिंक्डइन जैसी कंपनियां हाल के महीनों में हजारों कर्मचारियों की नौकरियां खत्म कर चुकी हैं। इनमें बड़ी संख्या उन भारतीय इंजीनियरों और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की है जो H-1B वीजा (H1B Visa Crisis) पर अमेरिका में काम कर रहे हैं। जो लोग सालों से अमेरिका में सेटल चुके थे, उनके लिए यह स्थिति अचानक बड़ा झटका बन गई है। नौकरी जाने का मतलब सिर्फ रोजगार खोना नहीं, बल्कि देश में रहने का अधिकार भी खतरे में पड़ जाना है।

H-1B वीजा और 60 दिन का नियम

H-1B वीजा की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह पूरी तरह कंपनी से जुड़ा होता है। अगर नौकरी चली जाती है, तो कर्मचारी के पास बहुत कम समय बचता है। अमेरिकी नियमों के अनुसार, नौकरी खत्म होने के बाद आमतौर पर 60 दिन का ग्रेस पीरियड मिलता है। इस दौरान व्यक्ति को नई नौकरी ढूंढनी होती है या किसी दूसरी वीजा कैटेगरी में जाना होता है। अगर ऐसा नहीं होता, तो उसे अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। यह 60 दिन का समय आखिरी सैलरी मिलने से नहीं, बल्कि नौकरी के अंतिम दिन से गिना जाता है। इसलिए कई बार लोगों को बहुत जल्दी निर्णय लेने पड़ते हैं।

परिवार, घर और भविष्य सब पर असर

अमेरिका में कई भारतीय पिछले कई सालों से रह रहे हैं। कुछ ने घर खरीदे हैं, कुछ के बच्चे वहीं पैदा हुए हैं और कई लोग स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन नौकरी जाने के बाद अचानक पूरी जिंदगी अनिश्चित हो जाती है। घर की EMI, बच्चों की पढ़ाई, हेल्थ इंश्योरेंस और रोजमर्रा का खर्च सब एक साथ तनाव बढ़ा देते हैं। ऐसे हालात में केवल नौकरी ढूंढना ही नहीं, बल्कि पूरा परिवार किस देश में रहेगा, यह भी बड़ा सवाल बन जाता है।

B-2 वीजा और अस्थायी विकल्प

कुछ लोग नौकरी जाने के बाद अमेरिका में रहने के लिए B-2 टूरिस्ट वीजा का सहारा लेते हैं। इसके जरिए वे कुछ समय के लिए देश में रह सकते हैं और नौकरी ढूंढ सकते हैं। लेकिन यह भी पूरी तरह सुरक्षित रास्ता नहीं है। हाल के समय में अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों की जांच और सख्ती बढ़ गई है। कई मामलों में दस्तावेजों की अतिरिक्त जांच की जा रही है, जिससे प्रक्रिया और मुश्किल हो गई है।

टेक इंडस्ट्री में तेजी से बदलाव

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल अब तक 1 लाख से ज्यादा टेक कर्मचारियों की नौकरी जा चुकी है। इसका बड़ा कारण कंपनियों की लागत कम करने की रणनीति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बढ़ता फोकस है। कंपनियां अब AI तकनीक में भारी निवेश कर रही हैं और कई पारंपरिक भूमिकाओं को कम किया जा रहा है। इससे नौकरी का बाजार और भी प्रतिस्पर्धी हो गया है। मेटा जैसी कंपनियां हजारों कर्मचारियों को AI प्रोजेक्ट्स में शिफ्ट भी कर रही हैं, लेकिन कई लोगों की नौकरियां फिर भी खत्म हो रही हैं।

भारतीय कर्मचारियों के लिए बढ़ती चुनौती

अमेरिका में H-1B वीजा पर काम करने वालों में सबसे बड़ा समूह भारतीयों का है। इसलिए छंटनी का सबसे ज्यादा असर भी उन्हीं पर पड़ रहा है। कई भारतीय प्रोफेशनल्स अब इस दबाव में हैं कि अगर नौकरी गई तो बहुत कम समय में नई कंपनी ढूंढनी होगी। टेक इंडस्ट्री में धीमी भर्ती और बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने यह काम और मुश्किल बना दिया है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, कई लोग अब भारत लौटने या कनाडा और यूरोप जैसे देशों में करियर बनाने पर भी विचार कर रहे हैं।

अमेरिकी ड्रीम पर सवाल

पहले अमेरिका को बेहतर नौकरी, ऊंची सैलरी और बेहतर जीवन का सपना माना जाता था। लेकिन अब लगातार छंटनी, वीजा की अनिश्चितता और AI के कारण बदलते जॉब मार्केट ने इस सोच को चुनौती दी है। कई कर्मचारियों के लिए अब यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या अमेरिका में लंबे समय तक सुरक्षित करियर संभव है या नहीं।

H-1B वीजा पर काम करने वाले भारतीयों के लिए मौजूदा समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। नौकरी जाना अब सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं रहा, बल्कि देश में रहने की लड़ाई बन गया है। 60 दिनों की समय सीमा के अंदर नई नौकरी ढूंढना या वैकल्पिक वीजा पाना हर किसी के लिए आसान नहीं है। AI और छंटनी के इस दौर में अमेरिका में काम करने वाले भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के सामने भविष्य पहले से कहीं ज्यादा अनिश्चित दिखाई दे रहा है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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