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GST Collection: जुलाई में GST से बंपर कमाई, सरकार की तिजोरी में आए 1.96 लाख करोड़

GST Collection: इस महीने कुल GST कलेक्शन बढ़कर 1.96 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल जुलाई में दर्ज 1.73 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 7.5% की बढ़त दर्शाता है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां रफ्तार पकड़ रही हैं और टैक्स कलेक्शन लगातार मजबूत हो रहा है।

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GST Collection (Pic Credit: iStock)

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GST Collection: जुलाई 2025 में सरकार को जीएसटी से जबरदस्त कमाई हुई है। इस महीने कुल GST कलेक्शन बढ़कर 1.96 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल जुलाई में दर्ज 1.73 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 7.5% की बढ़त दर्शाता है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां रफ्तार पकड़ रही हैं और टैक्स कलेक्शन लगातार मजबूत हो रहा है।

अब तक 8.18 लाख करोड़ की वसूली

जून 2025 में सरकार को 1.84 लाख करोड़ रुपये का GST कलेक्शन हुआ था। अगर पूरे पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की बात करें, तो सरकार ने कुल 22.08 लाख करोड़ रुपये GST के रूप में इकट्ठा किए, जो अब तक का रिकॉर्ड है।

इससे पहले अप्रैल 2025 में GST से 2.37 लाख करोड़ रुपये की वसूली हुई थी, जो साल-दर-साल 12.6% ज्यादा रही। ये लगातार सातवां महीना है जब GST कलेक्शन 1.8 लाख करोड़ रुपये से ऊपर बना हुआ है। अप्रैल से जुलाई 2025 तक कुल GST कलेक्शन 8.18 लाख करोड़ रुपये हो चुका है। यानी इस साल हर महीने औसतन 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का GST सरकार की तिजोरी में जमा हो रहा है, जबकि पिछले साल ये आंकड़ा औसतन 1.8 लाख करोड़ रुपये था।

किससे कितनी आई कमाई

वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2025 में सरकार को कुल 1.96 लाख करोड़ रुपये का GST रेवेन्यू मिला है। इसमें अलग-अलग टैक्स की हिस्सेदारी इस तरह रही:

  • CGST (केंद्र सरकार का हिस्सा): ₹35,470 करोड़
  • SGST (राज्य सरकारों का हिस्सा): ₹44,059 करोड़
  • IGST (राज्यों के बीच लेनदेन पर टैक्स): ₹1,03,536 करोड़
  • Cess (विशेष वस्तुओं पर टैक्स): ₹12,670 करोड़

इस दौरान, दुनिया भर में चल रही आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का विनिर्माण क्षेत्र (मैन्युफैक्चरिंग) भी मजबूत बना रहा। PMI (Purchasing Managers’ Index) जुलाई में 59.1 पर पहुंच गया, जो पिछले 16 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है।

GST कलेक्शन क्या होता है?

GST यानी Goods and Services Tax, ऐसा टैक्स है जो देश में वस्तुएं और सेवाएं बेचने पर लगाया जाता है। इसका मकसद एकसमान टैक्स सिस्टम बनाना है। इसमें चार हिस्से होते हैं:

  • CGST: केंद्र सरकार द्वारा वसूला गया टैक्स
  • SGST: राज्य सरकार द्वारा वसूला गया टैक्स
  • IGST: जब सामान या सेवा एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजी जाती है
  • Cess: कुछ खास और महंगी या प्रदूषण फैलाने वाली चीज़ों पर लगने वाला अतिरिक्त टैक्स
Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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