1 Year gratuity rule: केंद्र सरकार ने 21 नवंबर, 2025 को पुराने श्रम कानून की जगह 4 नए लेबर कोड लागू किया है। इसमें कर्मचारियों को बोनस, ग्रेच्युटी और दूसरे फायदे के तरीके में बड़े बदलाव किए। ग्रेच्युटी के लिए, सरकार ने घोषणा की कि फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी 5 साल के बजाय सिर्फ 1 साल की सर्विस के बाद ग्रेच्युटी मिलेगी। इसको लेकर नौकरीपेशा वर्ग के बीच भारी कन्फ्यूजन है। अगर आप भी किसी कंपनी में नौकरी करते हैं और 1 साल की ग्रेच्युटी को लेकर कन्फ्यूजन में हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। हम सही जवाब दे रहे हैं।
फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉई कौन?
टेक्निकली सभी एम्प्लॉई कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉई होते हैं, लेकिन, अगर आपके एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट में 1 साल, 2 साल जैसी कोई एंड डेट बताई गई है, तो आप फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉई कैटेगरी में आते हैं। आम बोलचाल में, इन एम्प्लॉई को ठेके पर रहे हुए कर्मचारी कहा जाता है, जबकि जिनके कॉन्ट्रैक्ट की कोई एंड डेट नहीं होती, उन्हें परमानेंट एम्प्लॉई कहा जाता है।
कौन होंगे 1 साल बाद ग्रेच्युटी के हकदार?
श्रम कानूनों के जानकारों का कहना है कि नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी के नियम में बदलाव का लाभ फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉई को ही मिलेगा। यानी जो कर्मचारी, किसी कंपनी में 1, 2 या 3 साल के लिए ठेके पर रखे जाएंगे, वे ही 1 साल के बाद ग्रेच्युटी पाने के हकदार होंगे। परमानेंट एम्प्लॉई के लिए नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी उनको 5 साल के बाद ही ग्रेच्युटी मिलेगी। इतना ही नहीं, अब प्रिंसिपल एम्प्लॉयर कॉन्ट्रैक्टर के जरिए रखे गए कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ ग्रेच्युटी समेत सोशल सिक्योरिटी कवरेज पाने के हकदार होंगे।
