Old or New Tax Regime : आप नई और पुरानी टैक्स रेजीम में किसे चुनना पसंद करेंगे, अब ये सवाल आपसे आपकी कंपनी करेगी। इस मामले में आयकर विभाग ने बुधवार को एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसके मुताबिक एमप्लॉयर्स यानी कंपनी को अपने कर्मचारियों से ये पूछना होगा कि वे चालू वित्त वर्ष में कौन सी टैक्स रेजीम चुनना चाहते हैं। दरअसल लोग जिस भी टैक्स रेजीम को चुनेंगे, उसी हिसाब से कंपनी उनका टीडीएस काटेगी। इसी के आधार पर कर्मचारियों को सैलेरी दी जाएगी।
अगर न चुनी कोई रेजीम तो क्या होगा
अगर कोई कर्मचारी अपनी कंपनी को मनचाही टैक्स रेजीम के बारे में नहीं बताता है तो कंपनी बजट 2023-24 में घोषित नई संशोधित टैक्स रेजीम के अनुसार सैलेरी इनकम में से टीडीएस की कटौती करेगी। ये व्यवस्था सबसे अधिक नौकरी करने वालों के लिए अहम है। उनके पास यह ऑप्शन है कि वे अधिक छूट और कई तरह की कटौती का फायदा लेने वाली पुरानी टैक्स रेजीम को चुनते हैं या फिर नयी टैक्स रेजीम, जिसमें 7 लाख रु तक की इनकम टैक्स फ्री रहती है।
सीबीडीटी ने जारी किया स्पष्टीकरण
नयी या पुरानी टैक्स रेजीम चुनने पर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने चालू वित्त वर्ष में एम्प्लॉयर द्वारा टीडीएस कटौती पर स्पष्टीकरण जारी किया है। सीबीडीटी ने साफ कर दिया है कि यदि कोई व्यक्ति किसी एक रेजीम को न चुने नयी टैक्स रेजीम को डिफॉल्ट रेजीम मानते हुए एम्प्लॉयर टीडीएस काटेगा।
नयी और पुरानी टैक्स रेजीम में अंतर
नई टैक्स रेजीम में 7 लाख रुपये तक की सालाना इनकम वाले लोगों को कोई टैक्स नहीं देना होगा। इस रेजीम में 50,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन की भी छूट दी गई है। साथ ही बेसिक छूट लिमिट को 3 लाख रुपये तक बढ़ा दिया गया है। साथ ही कुछ और छूट भी इस रेजीम में शामिल किए गये हैं। सरकार ने ऐसा इस रेजीम को आकर्षक बनाने के लिए किया है। पुरानी टैक्स रेजीम में कई तरह की छूट और कटौती की सुविधा मिलती है। इस रेजीम में बेसिक छूट लिमिट 2.5 लाख रुपये है। साथ ही, 5 लाख रुपये की वार्षिक आय वालों को कोई कर नहीं देना पड़ता।
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