नई दिल्ली। कोरोना काल में कुछ समय के लिए पूरी दुनिया में फ्लाइट बंद हो गई थीं, जिसकी वजह से एविएशन सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ। भारत के विमानन उद्योग पर भी इसका बुरा असर पड़ा। लेकिन अब जैसे-जैसे स्थिति सामान्य हो रही हैं, सेक्टर को हुए नुकसान की भरपाई भी हो रही है। एविएशन सेक्टर को उबारने के लिए सरकार भी हर संभव प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में अब केंद्र ने बड़ा फैसला लिया है। सेक्टर को रिकवरी के लिए सरकार की ओर से बड़ा बूस्टर मिला है।
सरकारी योजना में हुआ बड़ा बदलाव
वित्त मंत्रालय ने कोविड-19 महामारी (Coronavirus) से प्रभावित विमानन उद्योग को कैश के संकट से उबारने में मदद करने के लिए इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) में बड़ा बदलाव कर दिया है। मंत्रालय ने इस स्कीम के तहत लोन की लिमिट को बढ़ाया है। कर्ज सीमा 400 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 1,500 करोड़ रुपये हो गई है।
ऐसे तय होगी पात्रता
इस संबंध में जारी बयान के अनुसार, फाइनेंशियल सर्विस विभाग (DFS) ने माना कि देश के आर्थिक विकास के लिए कुशल और मजबूत नागरिक उड्डयन क्षेत्र महत्वपूर्ण है। एयरलाइंस के लिए अधिकतम लोन की राशि की पात्रता बढ़ाने के लिए ईसीएलजीएस में बदलाव किया गया। ईसीएलजीएस 3.0 के मुताबिक, एयरलाइन कंपनियों की पात्रता उनकी फंड बेस्ड या नॉन फंड बेस्ड लोन का 100 फीसदी या 1,500 करोड़ रुपये, जो भी कम हो, के आधार पर तय होगी।
बजट में बढ़ाई गई थी स्कीम की अवधि
मालूम हो कि सरकार की ओर से किए गए इन बदलावों का उद्देश्य विमानन कंपनियों को मौजूदा नकदी प्रवाह की समस्याओं से निपटने के लिए उचित ब्याज दरों पर आवश्यक कोलैट्रल फ्री यानी गिरवी मुक्त नकदी की सुविधा देना है। उल्लेखनीय है कि इस साल मार्च 2022 में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) की ओर से केंद्रीय बजट 2022-23 (Budget) में की गई घोषणा को लागू करने के लिए ईसीएलजीएस की अवधि को मार्च 2022 से बढ़ाकर मार्च 2023 कर दिया गया था।
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