अक्सर हम घर के पुराने कबाड़ को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने इसी 'कबाड़' को कमाई का बड़ा जरिया बना लिया है। प्रधानमंत्री मोदी के 'वेस्ट टू वेल्थ' (Waste to Wealth) मंत्र पर चलते हुए भारत सरकार ने साल 2021 से अब तक कबाड़ और पुरानी फाइलों को बेचकर कुल 4,405.28 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड आय अर्जित की है। प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, सरकारी दफ्तरों में चल रहे इस विशेष स्वच्छता अभियान ने न केवल खजाना भरा है, बल्कि कार्यालयों की सूरत भी बदल दी है।
किस मंत्रालय ने की सबसे ज्यादा कमाई?
इस कबाड़ निपटान अभियान में रेल मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और कोयला मंत्रालय सबसे आगे रहे हैं। सिर्फ जनवरी 2026 के महीने में ही कबाड़ बेचकर सरकार को 115.85 करोड़ रुपये की कमाई हुई। आंकड़ों की मानें तो दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के दो महीनों के भीतर ही 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का कबाड़ बेचा गया। यह कमाई उन पुरानी मशीनों, लोहे के कबाड़ और रद्दी कागजों से हुई है जो दशकों से सरकारी दफ्तरों के कोनों में धूल फांक रहे थे।
सिर्फ पैसा ही नहीं, जगह भी है खाली
कबाड़ बेचने का एक बड़ा फायदा यह हुआ है कि सरकारी दफ्तरों में अब सांस लेने की जगह बन गई है। जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस अभियान से देशभर में लगभग 4.34 लाख वर्ग फुट की कीमती ऑफिस स्पेस खाली हुई है। इसमें कोयला मंत्रालय ने सबसे ज्यादा करीब 1.88 लाख वर्ग फुट और भारी उद्योग मंत्रालय ने 62 हजार वर्ग फुट से अधिक जगह खाली की है। अब इस खाली हुई जगह का इस्तेमाल कर्मचारियों के बैठने और दफ्तरों को आधुनिक बनाने के लिए किया जा रहा है।
पुरानी फाइलों का 'डिजिटल' अंत
सरकार अब 'डिजिटल इंडिया' की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है। रिकॉर्ड मैनेजमेंट के तहत लाखों फाइलों की समीक्षा की गई, जिनमें से जनवरी में ही 81,322 फाइलें गैर-जरूरी पाई गईं और उन्हें हटा दिया गया। अब सरकारी कामकाज में फाइलों का बोझ कम हो रहा है। जनवरी 2026 में बनी कुल फाइलों में से 93.81 प्रतिशत ई-फाइलें थीं। इसका मतलब है कि अब दफ्तरों में कागजों के ढेर कम और कंप्यूटर पर काम ज्यादा हो रहा है। करीब 65 मंत्रालयों ने तो 90% से ज्यादा ई-फाइलिंग सिस्टम को अपना लिया है।
जन शिकायतों का भी हुआ निपटारा
सफाई सिर्फ दफ्तरों की ही नहीं, बल्कि फाइलों में दबी जनता की समस्याओं की भी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 5.57 लाख जन शिकायतों का निपटारा किया गया है, जो कुल शिकायतों का 90% से भी ज्यादा है। इसके अलावा सांसदों और राज्य सरकारों की ओर से आए सैकड़ों संदर्भों को भी सुलझाया गया है। फाइलों के निस्तारण की गति (Transaction level) भी 2021 के मुकाबले काफी बेहतर हुई है, जिससे प्रशासन में पारदर्शिता और रफ्तार आई है।
