1.5 लाख की Gold रिंग या ETF एक साल में किसने दिया ज्यादा रिटर्न?
- Authored by: रिचा त्रिपाठी
- Updated Dec 12, 2025, 08:40 AM IST
सोने की कीमतों में रिकॉर्ड 60% की उछाल ने गोल्ड निवेश का सुपरस्टार बना दिया है। लेकिन इतने तेज़ी वाले साल में भी दोनों विकल्पों के रिटर्न एक जैसे नहीं होते, क्योंकि रिंग और ETF दोनों की लागत, शुद्धता और निवेश का तरीका बिल्कुल अलग है। अगर आपने भी इस साल गोल्ड ETF लेने की बजाए रिंग ली है तो आइए आपको बताते हैं आपको कहां ज्यादा मिला?
Gold
साल 2025 सोने के निवेशकों के लिए किसी जैकपॉट साल से कम नहीं रहा। जहां बाकी मार्केट्स उतार–चढ़ाव में फंसे रहे, वहीं गोल्ड ने अपनी चमक ऐसी दिखाई कि हर निवेशक चौंक गया। साल की शुरुआत यानी जनवरी 2025 में सोना करीब ₹78,000 प्रति 10 ग्राम था, जिसे सामान्य बढ़त माना जा रहा था। लेकिन जैसे-जैसे साल आगे बढ़ा, अंतरराष्ट्रीय तनाव, डॉलर इंडेक्स में गिरावट और सेंट्रल बैंकों द्वारा भारी गोल्ड खरीद ने कीमतों को नई उड़ान दी। नतीजा यह हुआ कि 12 दिसंबर 2025 आते-आते सोना उछलकर ₹1,30,760 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। यानी लगभग 60% की रैली, जो आमतौर पर कई सालों में देखने को मिलती है।
ऐसे माहौल में ज्यादातर लोग एक ही सवाल पूछते नजर आए अगर मेरे पास 1.5 लाख रुपये हों, तो क्या गोल्ड रिंग खरीदना सही रहता या गोल्ड ETF ज्यादा फायदेमंद साबित होता?
1.5 लाख के सोने की आज कितनी वैल्यू होती?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों ही गोल्ड के विकल्प हैं, लेकिन रिटर्न का फर्क जमीन-आसमान जैसा हो सकता है। एक ओर गोल्ड रिंग में मेकिंग चार्ज, वेस्टेज और GST जैसे अतिरिक्त खर्च आपकी असली कमाई को खा जाते हैं। यानी 1.5 लाख रुपये देने के बावजूद आपको उतना “शुद्ध सोना” नहीं मिलता, जितना मिलना चाहिए। कीमत बढ़ने पर रिटर्न मिलता जरूर है, लेकिन कटौतियों के बाद वो उतना आकर्षक नहीं बचता।
वहीं दूसरी ओर गोल्ड ETF पूरी तरह से मार्केट-लिंक्ड, डिजिटल और पारदर्शी निवेश है। इसमें आपका हर रुपये का निवेश सीधे सोने की कीमत से जुड़ता है न मेकिंग चार्ज, न वेस्टेज, न सुरक्षा की चिंता। खरीदना-बेचना भी एक क्लिक में हो जाता है। यही कारण है कि साल 2025 जैसी तेज रैली में ETF में निवेश करने वाले लोगों ने पूरे 60% के रिटर्न का पूरा फायदा उठाया, जबकि रिंग खरीदने वाले कई लोग उतनी कमाई तक पहुंच ही नहीं पाए। आइए आपको गोल्ड ETF का पूरा कैलकुलेशन समझाते हैं।
2025 में रॉकेट बनी सोने की कीमतें
पिछले एक साल में सोने ने ऐसा प्रदर्शन किया है, जैसा शायद पिछले कई वर्षों में नहीं देखा गया। महंगाई, जियोपॉलिटिकल तनाव, कई देशों में चुनावी माहौल और डॉलर की कमजोरी जैसी वजहों ने सोने को लगातार मजबूत सपोर्ट दिया। यही कारण है कि सोना इस साल लगातार नए रिकॉर्ड बनाता रहा।
सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया भर में निवेशकों ने सोने को सुरक्षित निवेश (Safe-Haven Asset) की तरह अपनाया। बाजार में गिरावट या अनिश्चितता आने पर सबसे पहले निवेशक सोने की तरफ मुड़ते हैं, जिससे इसकी मांग और बढ़ गई।
2026 में भी सोने की चमक बरकरार रह सकती है
Axis Mutual Fund की रिपोर्ट के अनुसार, सोने का ये मजबूत प्रदर्शन 2026 में भी जारी रह सकता है। दुनियाभर के सेंट्रल बैंक लगातार सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं, जो कीमतों को सपोर्ट देता है। रिपोर्ट बताती है कि आने वाले साल में सोने के दाम में उछाल देखने का मौका मिल सकता है, हालांकि बीच-बीच में करेक्शन यानी हल्की गिरावट भी देखने को मिल सकती है। इसका मतलब यह है कि सोना अब भी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा विकल्प बना हुआ है।
इस साल गोल्ड ETF की रही सबसे ज्यादा चर्चा
गोल्ड ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड ने इस साल जबरदस्त निवेश देखा। आंकड़ों के अनुसार, 2025 की तीसरी तिमाही के अंत तक गोल्ड ETF का AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) बढ़कर 470 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह बताता है कि निवेशक अब भौतिक सोने की बजाय पेपर गोल्ड को ज्यादा पसंद कर रहे हैं क्योंकि यह सुरक्षित भी है, आसान भी और कहीं से भी खरीदा-बेचा जा सकता है। तीन तिमाहियों से गोल्ड बार और कॉइन की मांग भी लगातार 300 टन से ऊपर बनी हुई है। यानी भौतिक सोने और डिजिटल सोने दोनों की ही डिमांड मजबूत रही।
तो 1.5 लाख में गोल्ड रिंग या ETF कौन देता ज्यादा फायदा?
अगर आप 1.5 लाख रुपये की गोल्ड रिंग खरीदते हैं, तो उसमें मेकिंग चार्ज, वेस्टेज और GST जैसी कई अतिरिक्त लागत जुड़ जाती है। इसका मतलब है कि आपकी कुल राशि में से पूरा पैसा सोना खरीदने में नहीं लगता, बल्कि वास्तविक शुद्ध सोना कम मिलता है। इसी वजह से जब सोने की कीमतें बढ़ती भी हैं, तब भी रिंग पर उतना फायदा नहीं मिलता, जितना कच्चे सोने या मार्केट रेट के हिसाब से मिलना चाहिए। दूसरी ओर, अगर आप यही 1.5 लाख रुपये गोल्ड ETF में निवेश करते हैं, तो पूरा पैसा सीधे सोने में लगता है। इसमें न मेकिंग चार्ज होता है, न वेस्टेज, और न ही कोई छिपा खर्च। ETF खरीदना-बेचना भी बेहद आसान, सुरक्षित और पूरी तरह पारदर्शी होता है। इस साल सोने में लगभग 60% की तेजी को देखते हुए साफ कहा जा सकता है कि गोल्ड ETF पर रिटर्न काफी बेहतर निकलता है, क्योंकि आपके पूरे निवेश का फायदा आपको मिलता है। जबकि गोल्ड रिंग में 8–12% तक मेकिंग चार्ज आपकी कमाई को पहले ही काट देता है।
क्यों ETF बना निवेशकों का पहला विकल्प?
यह इसलिए हो रहा है क्योंकि आज के समय में निवेशक ऐसी जगह पैसा लगाना चाहते हैं, जहां जोखिम कम हो और रिटर्न बेहतर मिले। यही वजह है कि गोल्ड ETF तेजी से निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है। अस्थिर बाजार में यह एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है, जिसे आप आसानी से कभी भी खरीद और बेच सकते हैं। इसमें सोना रखने या उसकी सुरक्षा की चिंता नहीं रहती, क्योंकि यह पूरी तरह डिजिटल रूप में होता है। लंबे समय में इसका रिटर्न भी ज्यादा निकलता है, क्योंकि इसमें मेकिंग चार्ज या वेस्टेज जैसे कोई अतिरिक्त खर्च नहीं होते। Axis Mutual Fund की रिपोर्ट भी दिखाती है कि आने वाले समय में ETF में निवेश और बढ़ सकता है, खासकर युवाओं के बीच जो अब स्मार्ट, आसान और पारदर्शी निवेश विकल्पों को चुन रहे हैं।
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