Gold Price : सोने की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार गिरावट (gold prices falling) देखने को मिल रही है। बुधवार को भी गोल्ड प्राइस में तीसरी लगातार गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट की वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, डॉलर का मजबूत होना और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदें बताई जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना दबाव में है और निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश से हटता नजर आ रहा है।
जून में भारी नुकसान, कई सालों का सबसे खराब प्रदर्शन
सोने ने जून महीने में करीब 12% की गिरावट दर्ज की है और यह लगातार चौथे महीने गिरावट की ओर बढ़ रहा है। इससे पहले अक्टूबर 2008 में सोने में 18.5% की सबसे बड़ी मासिक गिरावट देखी गई थी। मौजूदा स्थिति में सोना तिमाही आधार पर भी गिरावट की ओर है और यह 2013 के बाद सबसे बड़ी तिमाही गिरावट मानी जा रही है। पिछले तीन महीनों में सोना करीब 20% टूट चुका है। वहीं, पिछले छह महीनों में इसमें 8% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, एक साल के आधार पर देखें तो सोना अभी भी करीब 20% ऊपर बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का हाल
स्पॉट गोल्ड बुधवार को 0.8% गिरकर 3,974.75 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इससे पहले यह नवंबर के बाद के सबसे निचले स्तर 3,942.99 डॉलर तक फिसल गया था। वहीं अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 1.3% गिरकर 3,987.70 डॉलर प्रति औंस पर आ गए। अमेरिकी ट्रेजरी मार्केट में भी दबाव देखा गया, जिससे 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.465% तक पहुंच गई। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोने पर दबाव बनता है क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता, जबकि बॉन्ड में रिटर्न मिलता है।
बुलियंस के मुताबिक सोने का आज का भाव (02 जुलाई 2026)
| सोने के प्रकार | 1 ग्राम (₹) | 10 ग्राम (₹) | 100 ग्राम (₹) | 1 किलोग्राम (₹) | 1 औंस (₹) | 1 तोला (₹) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| सोना 24 कैरेट | ₹14,467 | ₹1,44,670 | ₹14,46,700 | ₹1,44,67,000 | ₹4,10,133 | ₹1,68,740 |
| सोना 22 कैरेट | ₹13,261 | ₹1,32,614 | ₹13,26,142 | ₹1,32,61,417 | ₹3,75,955 | ₹1,54,679 |
| सोना 20 कैरेट | ₹12,056 | ₹1,20,558 | ₹12,05,583 | ₹1,20,55,833 | ₹3,41,777 | ₹1,40,617 |
| सोना 18 कैरेट | ₹10,850 | ₹1,08,503 | ₹10,85,025 | ₹1,08,50,250 | ₹3,07,599 | ₹1,26,555 |
| सोना 16 कैरेट | ₹9,645 | ₹96,447 | ₹9,64,467 | ₹96,44,667 | ₹2,73,422 | ₹1,12,494 |
| सोना 14 कैरेट | ₹8,439 | ₹84,391 | ₹8,43,908 | ₹84,39,083 | ₹2,39,244 | ₹98,432 |
| सोना 12 कैरेट | ₹7,234 | ₹72,335 | ₹7,23,350 | ₹72,33,500 | ₹2,05,066 | ₹84,370 |
| सोना 10 कैरेट | ₹6,028 | ₹60,279 | ₹6,02,792 | ₹60,27,917 | ₹1,70,889 | ₹70,308 |
डॉलर की मजबूती और फेड की नीतियां बनी बड़ी वजह
डॉलर इंडेक्स में मजबूती भी सोने की गिरावट का एक बड़ा कारण है। डॉलर जब मजबूत होता है तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे मांग घटती है। ट्रेडर्स के बीच यह उम्मीद बढ़ रही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जल्द ही ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। फेडरल रिजर्व से जुड़ी नीतियों को लेकर बाजार काफी सतर्क है। CME Group के FedWatch Tool के अनुसार बाजार में करीब 67% संभावना सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की मानी जा रही है। इसी वजह से सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश पर दबाव बढ़ रहा है।
भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई का असर
मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव भी बाजार को प्रभावित कर रहा है। हालांकि आमतौर पर ऐसे तनाव से सोने में तेजी आती है, लेकिन इस बार ब्याज दरों की उम्मीद और मजबूत डॉलर का असर ज्यादा दिख रहा है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई की चिंता भी बनी हुई है, जिससे फेड पर सख्त नीति बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है। इसी कारण निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं।
जारी रह सकता है उतार-चढ़ाव
Tata Mutual Fund का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में कॉनसोलिडेशन देखने को मिल सकता है। हालांकि ब्याज दरों में बढ़ोतरी, मजबूत डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड से दबाव बना रह सकता है। कंपनी के अनुसार भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण सोने में करीब ±5% तक की अस्थिरता बनी रह सकती है। लेकिन रुपये में कमजोरी भारतीय निवेशकों को कुछ हद तक राहत दे सकती है।
तकनीकी स्तर और आगे का अनुमान
मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक ऑग्मनन्ट की रिसर्च प्रमुख रेनिशा चैनानी के अनुसार सोने ने 4,000 डॉलर का अहम स्तर तोड़ दिया है, जो एक कमजोर संकेत है। उनका कहना है कि अगर यह दबाव जारी रहा तो सोना 3,600 डॉलर तक भी जा सकता है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में बाजार ज्यादा बिकवाली की स्थिति में है, जिससे थोड़ी राहत रैली भी देखने को मिल सकती है और कीमतें 4,100 से 4,165 डॉलर तक वापस जा सकती हैं।
लंबी अवधि में अभी भी उम्मीद कायम
एक्स्पर्ट्स का मानना है कि अल्पकाल में सोने में उतार-चढ़ाव और दबाव बना रह सकता है। लेकिन लंबी अवधि में सोने के बुनियादी कारण अभी भी मजबूत हैं, जैसे वैश्विक अनिश्चितता, मुद्रास्फीति का जोखिम और सुरक्षित निवेश की मांग। इसलिए निवेशकों के लिए फिलहाल सावधानी जरूरी है, लेकिन गिरावट को लंबी अवधि के निवेश अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है।
