अगर कोई पिता अपने बेटे को कार गिफ्ट करता है तो ओनरशिप ट्रांसफर के लिए RTO Form 30 को सबमिट करने की जरूरत होगी। जी हां, इसी तरह अगर आप पुरानी कार या बाइक खरीदने या बेचने की तैयारी कर रहे हैं, तो वाहन की कीमत तय करना और पैसे का लेन-देन करना ही काफी नहीं है। गाड़ी का Registration Certificate भी नए मालिक के नाम ट्रांसफर करवाना जरूरी होता है। इसी, Ownership Transfer की प्रक्रिया में RTO Form 30 महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आइए जानते हैं क्या होता है RTO Form 30-
क्या है RTO Form 30?
आसान भाषा में समझें तो Form 30 वाहन के मालिकाना हक में बदलाव की जानकारी RTO को देने और RC को नए मालिक के नाम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें पुराने मालिक और नए मालिक से जुड़ी जरूरी जानकारी दर्ज की जाती है।
कब जरूरी होता है Form 30?
अगर आप किसी व्यक्ति से पुरानी कार या बाइक खरीद रहे हैं, तो Ownership Transfer के लिए Form 30 की जरूरत होती है। इसी तरह अगर आप अपनी पुरानी गाड़ी किसी दूसरे व्यक्ति को बेच रहे हैं, तो भी इस प्रक्रिया में Form 30 इस्तेमाल किया जाता है।
अगर किसी दूसरे राज्य से पुराना वाहन खरीदा जा रहा है और उसका मालिकाना हक ट्रांसफर होना है, तब भी अन्य लागू दस्तावेजों के साथ Form 30 जमा करना पड़ सकता है।
इतना ही नहीं, कुछ पात्र गिफ्ट ट्रांसफर में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए अगर पिता अपनी कार या बाइक बेटे को गिफ्ट करते हैं तो Ownership Transfer की प्रक्रिया में Form 30 की जरूरत हो सकती है। परिवार के सदस्यों के बीच वाहन को गिफ्ट के तौर पर ट्रांसफर करने या पति-पत्नी के बीच पात्र गिफ्ट ट्रांसफर में भी लागू नियमों के अनुसार Form 30 इस्तेमाल किया जा सकता है।
Form 30 की जरूरत कब नहीं होती
हालांकि, हर तरह के Ownership Change के लिए Form 30 इस्तेमाल नहीं किया जाता। उदाहरण के लिए अगर आप शोरूम से बिल्कुल नई कार या बाइक खरीदते हैं तो Form 30 की जरूरत नहीं होती। नई गाड़ी की पहली Registration सीधे खरीदार के नाम पर की जाती है।
इसी तरह, अगर वाहन के रजिस्टर्ड मालिक की मृत्यु के बाद Ownership Transfer किया जा रहा है, तो इसके लिए Form 30 की जगह Form 31 का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं Public Auction के जरिए खरीदे गए वाहन के Ownership Transfer के लिए Form 32 लागू होता है।
