Forex Reserves Down : भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में लगातार बढ़ोतरी के बाद एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार 5 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 71.1 करोड़ डॉलर (711 मिलियन डॉलर) घटकर 681.610 अरब डॉलर रह गया। इससे पिछले सप्ताह यह 93.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 682.321 अरब डॉलर पर पहुंच गया था।
FCA में 2.7 अरब डॉलर की गिरावट
RBI के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (Foreign Currency Assets-FCA) रिपोर्ट किए गए सप्ताह में 2.704 अरब डॉलर घटकर 543.444 अरब डॉलर रह गईं। FCA में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड स्टर्लिंग और जापानी येन जैसी प्रमुख विदेशी मुद्राएं भी शामिल होती हैं। इन मुद्राओं के डॉलर के मुकाबले मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भी एफसीए के मूल्यांकन पर पड़ता है।
गोल्ड रिजर्व ने दी राहत
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में गिरावट के बावजूद देश के स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली। रिपोर्टिंग सप्ताह के दौरान गोल्ड रिजर्व 1.975 अरब डॉलर बढ़कर 114.575 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हाल के महीनों में केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मजबूती का असर भारत के गोल्ड रिजर्व पर भी दिखाई दे रहा है।
SDR में भी मामूली बढ़ोतरी
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) का मूल्य भी बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार एसडीआर 1.8 करोड़ डॉलर (18 मिलियन डॉलर) बढ़कर 18.765 अरब डॉलर हो गया।
IMF के पास भारत की रिजर्व पोजिशन
रिपोर्ट किए गए सप्ताह के दौरान IMF के पास भारत की रिजर्व पोजिशन 4.826 अरब डॉलर रही। यह विदेशी मुद्रा भंडार का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
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क्या है विदेशी मुद्रा भंडार का महत्व?
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की बाहरी वित्तीय मजबूती का प्रमुख संकेतक माना जाता है। इसका उपयोग आयात भुगतान, विदेशी ऋण दायित्वों को पूरा करने और रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव की स्थिति में मुद्रा बाजार को स्थिर रखने के लिए किया जाता है। 681 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार भारत को दुनिया के सबसे बड़े रिजर्व रखने वाले देशों में शामिल करता है और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच यह देश की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत आधार प्रदान करता है।
