बिजनेस

ऐसा पहली बार! 2026 में होगा देशव्यापी घरेलू आय का सर्वे, बदलेंगी आर्थिक नीतियों की दिशा!

Household Income Survey: भारत का सांख्यिकी मंत्रालय 2026 में पहली बार एक व्यापक घरेलू आय सर्वेक्षण करने की तैयारी कर रहा है, जिसका उद्देश्य नीतियों को डेटा आधारित बनाना है। इस प्रयास के लिए पूर्व IMF निदेशक सुरजीत भल्ला की अध्यक्षता में एक तकनीकी सलाहकार समूह गठित किया गया है, जो राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय को सर्वे की योजना, क्रियान्वयन और परिणाम विश्लेषण में मार्गदर्शन देगा। यह आगामी घरेलू आय सर्वे न केवल नीति निर्धारण को मजबूती देगा, बल्कि यह देश के वास्तविक आय असमानता और कल्याण स्तर को समझने में अहम भूमिका निभाएगा।

Image

पहली बार होगा अखिल भारतीय घरेलू आय सर्वे

Photo : iStock

Household Income Survey : सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) 2026 में एक घरेलू आय सर्वेक्षण आयोजित करने जा रहा है। यह देश का पहला ऐसा सर्वे होगा जो घरेलू आय वितरण, आर्थिक कल्याण और डेटा-आधारित नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा।

तकनीकी सलाहकार समूह (TEG) का गठन

इस सर्वे को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने एक तकनीकी सलाहकार समूह (TEG) गठित किया है, जिसकी अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ सुरजीत भल्ला करेंगे।

TEG निम्नलिखित बिंदुओं पर मार्गदर्शन देगा

  • सर्वे की परिभाषाएं और अवधारणाएं
  • सर्वे की कार्यप्रणाली, उपकरण और प्रश्नावली
  • सैंपलिंग डिजाइन और आंकड़ों के आकलन की विधियां
  • दुनिया भर में अपनाई गई सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं का समावेश

तकनीक के प्रभाव का होगा मूल्यांकन

सर्वे में यह भी आंका जाएगा कि तकनीकी इनोवेशन (जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऐप्स आदि) ने घरेलू आय और मजदूरी पर क्या असर डाला है।

सर्वे के नतीजों पर भी एक्सपर्ट्स की नजर

TEG सर्वे के निष्कर्षों और रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में भी मार्गदर्शन देगा। मंत्रालय ने इसे घरेलू आय के आंकड़े एकत्र करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।

अतीत में हुए प्रयास लेकिन अधूरे

अतीत में मंत्रालय ने घरेलू आय संबंधी जानकारी एकत्र करने के कई प्रयास किए थे। 1955 और 1958 में उपभोक्ता व्यय सर्वे के साथ घरेलू आय के आंकड़े एकत्र करने की कोशिश हुई, लेकिन कोई रिपोर्ट प्रकाशित नहीं हुई। 1964–65 और 1969–70 में ‘Integrated Household Survey’ के जरिये प्राप्ति और व्यय पर डेटा जुटाया गया, लेकिन आय के अनुमान, खपत और बचत से कम निकले, जिससे ये प्रयास रोक दिए गए। 1983–84 में एक पायलट स्टडी की गई, लेकिन वह भी अखिल भारतीय सर्वे में तब्दील नहीं हो सकी।

अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से मिलेगी दिशा

बयान में कहा गया है कि अब इन पूर्व प्रयासों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए, और ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों की सर्वे प्रक्रियाओं को देखकर साफ-सुथरी और भरोसेमंद कार्यप्रणाली विकसित की जाएगी।

NSSO की अन्य नई पहलें

राष्ट्रीय सैंपल सर्वे कार्यालय (NSSO) ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण सर्वे शुरू किए हैं:- अविनियमित क्षेत्रों के उद्यमों पर वार्षिक सर्वे, सेवाक्षेत्र पर विस्तृत आंकड़े, निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय पर अग्रिम दृष्टिकोण से सर्वे, इनका उद्देश्य है देश में महत्वपूर्ण मैक्रोइकोनॉमिक संकेतकों के लिए भरोसेमंद डेटा उपलब्ध कराना।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article