Flight Rules : फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने विमानन सुरक्षा नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से आग्रह किया है कि वह एयरलाइन कंपनियों को नई उड़ान ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) और आराम अवधि के नियमों में किसी भी प्रकार की छूट या विस्तार न दे। संगठन ने कहा कि अगर डीजीसीए ने ऐसा कोई आदेश या संचार जारी किया है, तो उसे तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए।
एफआईपी ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
देशभर में 5,000 से अधिक पायलटों का प्रतिनिधित्व करने वाला एफआईपी ने स्पष्ट कहा है कि अगर डीजीसीए इन नियमों को लागू करने में विफल रहता है, तो वह कानूनी सहारा लेने पर मजबूर होगा। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक फेडरेशन ने डीजीसीए के महानिदेशक को लिखे पत्र में कहा कि भारतीय पायलट महासंघ, डीजीसीए से अनुरोध करता है कि वह सीएआर 2024 (एफडीटीएल विनियम) के कार्यान्वयन में एयरलाइंस को दी जा रही किसी भी छूट या विस्तार को तुरंत वापस ले या निरस्त करे। संगठन ने चेतावनी दी कि अगर निर्धारित समयसीमा के भीतर एयरलाइंस नए नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो फेडरेशन डीजीसीए और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जानबूझकर अवज्ञा और न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई शुरू करेगा।
दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश और डीजीसीए की भूमिका
गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने डीजीसीए को नए एफडीटीएल मानदंडों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। इस निर्देश के बाद एयरलाइंस ने, जिनमें इंडिगो और एयर इंडिया जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं, इन नियमों को लागू करने पर सहमति जताई थी।
दो चरणों में लागू हो रहे हैं नए मानदंड
डीजीसीए द्वारा जारी किए गए नए उड़ान ड्यूटी और विश्राम अवधि के नियमों को दो चरणों में लागू किया जा रहा है। पहला चरण जुलाई 2025 से प्रभावी हो चुका है। इसमें साप्ताहिक विश्राम अवधि को बढ़ाकर 48 घंटे किया गया है। रात्रिकालीन समय की अवधि बढ़ाई गई है और रात्रिकालीन लैंडिंग की संख्या को पहले के 6 से घटाकर केवल दो कर दिया गया है। दूसरा चरण अगले महीने (नवंबर 2025) से लागू होगा, जिसमें दो रात्रिकालीन लैंडिंग की सीमा को औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा।
थकान से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं का समाधान
सरकार ने नए एफडीटीएल नियमों को लागू करते समय कहा था कि ये प्रावधान पायलटों की थकान से जुड़ी विमानन सुरक्षा जोखिमों को कम करने में सहायक होंगे। पायलट समुदाय लंबे समय से यह मुद्दा उठाता रहा है कि अत्यधिक उड़ान घंटे और अपर्याप्त विश्राम अवधि के कारण सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
एयरलाइंस का विरोध
हालांकि शुरू में इंडिगो, एयर इंडिया सहित कई घरेलू एयरलाइंस ने इन नियमों का विरोध किया था, लेकिन न्यायालय के हस्तक्षेप और डीजीसीए के निर्देशों के बाद वे इन्हें लागू करने पर सहमत हुईं। अब फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इन नियमों में किसी भी प्रकार की ढील या देरी न दी जाए, ताकि विमानन सुरक्षा से समझौता न हो।
