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AI से नौकरियां जाने की आशंका निराधार, भारतीय आईटी कंपनियों के अवसर बढ़ेंगेः गोयल

वाणिज्य मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब 315 अरब डॉलर के भारतीय आईटी उद्योग और उससे जुड़े करीब 60 लाख रोजगार पर एआई के संभावित असर को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है।

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गोयल ने कहा, "कोई भी देश खुद को अलग-थलग रखकर विकसित नहीं हुआ है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार कृत्रिम मेधा (Artificial Intelligence) के कारण सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) क्षेत्र में नौकरियां जाने की आशंका को निराधार बताते हुए कहा कि नई प्रौद्योगिकी से भारतीय कंपनियों के लिए अवसर बढ़ेंगे। गोयल ने यहां ’ईवाई’ की तरफ से आयोजित एक पुरस्कार समारोह में कहा कि एआई के रोजगार पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को लेकर वह ’थोड़ा भी चिंतित नहीं’ हैं। उन्होंने एआई पर हो रहे व्यापक वैश्विक निवेश की तुलना वर्ष 2000 के ’वाई2के’ दौर से की, जब यह आशंका जताई जा रही थी कि सदी बदलने पर कंप्यूटर काम करना बंद कर देंगे।

उन्होंने कहा, "वाई2के के समय भी ऐसी आशंकाएं थीं कि सबकुछ ठप हो जाएगा। लेकिन एक जनवरी, 2000 के बाद भारतीय आईटी उद्योग ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मैं एआई को भी वैसा ही निर्णायक मोड़ मानता हूं।" वाणिज्य मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब 315 अरब डॉलर के भारतीय आईटी उद्योग और उससे जुड़े करीब 60 लाख रोजगार पर एआई के संभावित असर को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है।

AI एक शक्तिशाली क्रांति

गोयल ने एआई को बेहतर भविष्य के लिए एक ’शक्तिशाली क्रांति’ बताते हुए कहा, ’’जितना अधिक हम प्रौद्योगिकी से जुड़ेंगे, उतनी ही मानव कौशल और प्रतिभा की जरूरत बढ़ेगी। इससे नए अवसर भी पैदा होंगे।’’ उन्होंने कहा कि एआई से अधिक मुनाफा, बेहतर कामकाज और निर्यात के नए अवसर खुलेंगे, जिनका लाभ देश के 23 लाख विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी और गणित (एसटीईएम) स्नातक उठा सकेंगे।

केंद्रीय मंत्री ने हाल के वर्षों में हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में दो-तिहाई हिस्सेदारी रखने वाले 38 विकसित देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। इन समझौतों से भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं, नवाचार नेटवर्क और प्रतिभा गतिशीलता से जुड़ने में मदद मिलेगी।

अलग-थलग होकर विकास संभव नहीं

गोयल ने कहा, "कोई भी देश खुद को अलग-थलग रखकर विकसित नहीं हुआ है। जो देश नवाचार करते हैं, दुनिया से जुड़ते हैं और प्रतिस्पर्धा स्वीकार करते हैं, वही आगे बढ़ते हैं।" उन्होंने चीन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत उसकी दक्षता और पैमाने से सीख सकता है, लेकिन अपना देश मानवीय मूल्यों के साथ आगे बढ़ना चाहता है।

इस कार्यक्रम में उद्योगपति सज्जन जिंदल ने कहा कि भारत को बुलेट ट्रेन जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए चीन से सीखना चाहिए। जिंदल ने कहा कि चीन में हजारों किलोमीटर लंबी बुलेट ट्रेन चल रही हैं, जबकि भारत में परियोजना अभी भी पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है।

(इनपुट-भाषा)

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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