Gold price Story: सोने की कीमत में गिराटव जारी है। सोना अपने रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे आ चुका है। मार्च महीने में अबतक सोना 20% से ज्यादा सस्ता हो चुका है। हालिया रिकॉर्ड हाई से देखें तो गिरावट और भी गहरी है, जहां सोना करीब 24% की गिरावट आई है। वहीं वैश्विक मार्केट में सोना अब तक के सबसे ऊंचे स्तर $5595 से लगभग 27% तक गिर चुकी हैं। सोने में गिरावट से निवेशक परेशान हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि इस सेफ हेवन को आखिर हुआ क्या है? युद्ध जैसे हालात में सोना लगातार सस्ता क्यों हो रहा है। हालांकि, Europac के मुख्य अर्थशास्त्री और वैश्विक रणनीतिकार पीटर शिफ इस गिरावट से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उन्होंने एक्स पर ट्वीट कर 2008 का उदाहरण साझा किया है। उन्होंने लिखा है कि कीमतों में आई यह नरमी सोने के लिए 11,000 डॉलर का आंकड़ा पार करने का रास्ता खोल सकती है। आइए जानते हैं कि 2008 में क्या हुआ था और उसके बाद क्या हुआ?
2008 में बड़ी गिरावट के बाद आई थी बड़ी तेजी
पीटर शिफ का यह आशावाद उस रुझान पर आधारित है जो आखिरी बार 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट (GFC) के दौरान देखा गया था। उस समय भी, ठीक इस बार की तरह, सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई थी और भू-राजनीतिक तथा व्यापक आर्थिक संकट के बीच 'सुरक्षित निवेश' (safe-haven) माने जाने के अपने स्वभाव के विपरीत इसने खराब प्रदर्शन किया था। शिफ 2008 के GFC (वैश्विक वित्तीय संकट) के दौरान देखे गए एक ऐसे ही ट्रेंड की ओर इशारा करते हैं, जब कीमतें 32% तक गिर गई थीं, जिससे बुल मार्केट में हुई लगभग 40% बढ़त खत्म हो गई थी।
हालांकि, बड़ी गिरावट के अगले तीन सालों में सोने की कीमत में 178% की तेजी आई। शिफ कहते हैं कि एक बार फिर, सोने की कीमतों में आई गिरावट ने रिकॉर्ड हाई से करीब 40% हिस्सा खत्म कर दिया है। ऐसे में अगर सोने के भाव में अपने मौजूदा निचले स्तर से 178% की तेजी आती है तो अगले तीन सालों में सोने की कीमत 11,400 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
लंबे समय के लिए नजरिया पूरी तरह से पॉजिटिव
जानकारों का यह भी मानना है कि सोने की कीमतों के लिए लंबे समय का नजरिया पूरी तरह से पॉजिटिव बना हुआ है। इसकी वजह कुछ ढांचागत बदलाव हैं, जैसे कि डॉलर पर निर्भरता कम होना और वैश्वीकरण का कम होना है। ये ऐसे बदलाव हैं जो कई सालों से चल रहे हैं और धीरे-धीरे दुनिया के फाइनेंशियल सिस्टम को नया रूप दे रहे हैं।
