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ET NOW GBS 2026 : कैपिटल मार्केट के केंद्र में आम आदमी, सेबी निवेशकों का रक्षक : तुहिन कांत पांडे

ET NOW GBS 2026: ET ONW ग्लोबल बिजनेस समिट में सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय कैपिटल मार्केट मजबूत रहा है। निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, T+1 सेटलमेंट और आसान लिस्टिंग नियम बाजार को भविष्य के लिए तैयार बना रहे हैं।

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ईटी नाउ के ग्लोबल बिजनेस समिट में बोलते हुए सेबी चीफ

ET NOW ग्लोबल बिजनेस समिट में मार्केट रेगुलेटर सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि कोविड के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था और बाजारों में तेज तकनीकी बदलाव देखने को मिले हैं, लेकिन यह पूरा दशक भारी अनिश्चितताओं और उथल-पुथल से भरा रहा है। महामारी, जियो-पॉलिटिकल तनाव, टैरिफ विवाद और युद्ध जैसी चुनौतियों के बावजूद भारतीय पूंजी बाजार मजबूती से खड़ा रहा और लगातार ग्रोथ देता रहा।

बदलती चुनौतियों के बीच मजबूत बाजार की जरूरत

पांडे ने कहा कि आने वाले समय में चुनौतियों का स्वरूप बदल सकता है, लेकिन बाजार में अस्थिरता बनी रहना तय है। ऐसे में जरूरी है कि बाजार संरचनात्मक रूप से मजबूत हो और भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सके। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी, भरोसा, टीमवर्क और पारदर्शिता आगे चलकर रेगुलेटरी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

निवेशकों की भागीदारी में ऐतिहासिक उछाल

सेबी चीफ ने कहा कि भारत का कैपिटल मार्केट तेजी से बदल रहा है और आम निवेशकों की भागीदारी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। आज देश में करीब 14 करोड़ यूनिक निवेशक बाजार से जुड़े हैं, जो एक दशक पहले अकल्पनीय था। इसी अवधि में भारतीय बाजार का मार्केट कैप चार गुना बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर पहुंच गया, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

रेगुलेटर को प्रो-एक्टिव बनना होगा

पांडे ने कहा कि जब टेक्नोलॉजी और बाजार दोनों तेजी से बदल रहे हों, तब रेगुलेटर्स केवल रिएक्टिव नहीं रह सकते। उन्हें संभावित चुनौतियों को पहले से समझते हुए प्रो-एक्टिव और एंटीसिपेटरी दृष्टिकोण अपनाना होगा। इसके लिए जरूरी है कि रेगुलेटर तकनीकी रूप से बाजार भागीदारों से पीछे नहीं बल्कि आगे रहें।

सेबी अब सिर्फ रेगुलेटर नहीं, मार्केट डेवलपर भी

उन्होंने कहा कि आज म्यूचुअल फंड, इक्विटी और डेट बाजार के जरिये आम निवेशक कैपिटल मार्केट के केंद्र में आ चुका है। ऐसे में रेगुलेटर की भूमिका भी बदल रही है। सेबी अब केवल नियम लागू करने वाली संस्था नहीं बल्कि एक डायनेमिक मार्केट डेवलपर के रूप में काम कर रही है, क्योंकि बाजार में बढ़ती भागीदारी के साथ जिम्मेदारियां और जटिलताएं भी बढ़ती हैं।

भविष्य की जरूरतों के मुताबिक तैयारी

सेबी की तैयारियों पर बोलते हुए पांडे ने कहा कि रेगुलेटरी गुणवत्ता को बाजार के बढ़ते आकार के अनुरूप मजबूत बनाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया के उन बड़े बाजारों में शामिल है जहां T+1 सेटलमेंट सिस्टम लागू है, जिससे जोखिम कम होता है और निवेशकों के लिए पूंजी तक पहुंच आसान बनती है।

कंपनियों के लिए फंड जुटाना आसान

पांडे ने कहा कि सेबी ने कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को आसान बनाया है। लिस्टिंग नियमों को सरल किया गया है और प्रक्रिया का समय घटाया गया है ताकि कंपनियां तेजी से पब्लिक फंडिंग जुटा सकें। साथ ही बड़ी कंपनियों की लिस्टिंग को आसान बनाने के लिए इश्यू के न्यूनतम आकार की शर्तों में भी ढील दी गई है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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