स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा भारतीय बैडमिंटन संघ की फंडिंग रोके जाने वाले मामले में नया खुलासा हुआ है। विश्वसनीय सूत्रों ने 'टाइम्स नाउ' को बताया कि दिसंबर 2025 में हुई ACTC की बैठक में, BAI (भारतीय बैडमिंटन संघ) ने अपनी वित्तीय जरूरतें रखीं और 2026 के लिए पूरे साल के टूर्नामेंटों का एक कैलेंडर पेश किया।
हालांकि, मंत्रालय ने केवल एशियाई खेलों तक के लिए ही फंडिंग को मंजूरी दी, जिससे अन्य टूर्नामेंटों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह मामला एशियाई खेलों के दौरान सामने आया, जब भारत की वर्ल्ड जूनियर टीम को मिस्र में एक टूर्नामेंट के लिए जाना था, लेकिन तब तक फंड मंजूर नहीं हुआ।अंत में, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) या मंत्रालय से कोई मदद न मिलने पर BAI के अधिकारियों ने खुद आगे आकर पूरी टीम के दौरे का खर्च उठाया।
माना जा रहा है कि पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन समेत कई खिलाड़ी, वित्तीय सहायता और टूर्नामेंटों में भाग लेने को लेकर बनी अनिश्चितता से नाखुश हैं।दिलचस्प बात यह है कि BAI का कहना है कि भारतीय बैडमिंटन के लिए 'वर्ल्ड टूर' का पिछला साल सबसे सफल वर्षों में से एक रहा है। इसमें पीवी सिंधु, अस्मिता चालिहा, लक्ष्य सेन, आयुष शेट्टी और पुरुष डबल्स जोड़ी चिराग शेट्टी व सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी का प्रदर्शन शानदार रहा।
दूसरी ओर, खेल मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि BAI ने समय पर अपना वित्तीय प्रस्ताव जमा नहीं किया था। हालांकि, BAI के सूत्रों ने इस आरोप को खारिज कर दिया है। वहीं, इससे पहले BAI ने खिलाड़ियों को WhatsApp मैसेज भेजकर बजट में कमी की जानकारी दी थी। ऑर्गनाइजेशन ने कहा कि वह फिनलैंड में पहले इवेंट के लिए रहने का खर्च उठाएगा, लेकिन खिलाड़ी अपने आने-जाने, रहने, खाने और दूसरे खर्चों के लिए खुद जिम्मेदार होंगे।
ऐसे में कुछ एथलीट को पैसे की कमी की वजह से अपने कोच के बिना मुकाबला करना पड़ा। उदाहरण के लिए, अश्मिता चालिहा ने फ्रेंच ओपन के दौरान अपनी टीम की साथी इशारानी बरुआ के साथ अकाने यामागुची को हराकर उनकी कोच की भूमिका भी बखूबी निभाई। तन्वी शर्मा, जो डेनिश क्वार्टर फाइनल में पहुंचीं, उनके पास भी एक गेम के दौरान मदद के लिए कोच नहीं था।
