EPF vs NPS : रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रहने के लिए एक बड़ा फंड तैयार करना बहुत जरूरी है। भारत में इसके लिए एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) दो सबसे लोकप्रिय विकल्प हैं। कई लोग इन दोनों में ही निवेश करते हैं, जबकि कुछ किसी एक को चुनते हैं। अगर आप 30 साल की उम्र से हर महीने 5,000 रुपये का निवेश शुरू करते हैं और हर साल अपनी निवेश राशि में 5% की बढ़ोतरी करते हैं तो 60 साल की उम्र तक कौन सा विकल्प आपको ज्यादा रिटर्न दे सकता है? आइए आसान भाषा में इसका गणित और दोनों स्कीम्स का फर्क समझते हैं।
EPF से 30 साल में कितना फंड बनेगा?
EPF में मिलने वाला ब्याज सरकार द्वारा हर साल तय किया जाता है। मान लीजिए कि आपका बेसिक वेतन और DA मिलाकर 41,666 प्रति महीना है। आप अपनी तरफ से 12% यानी 5,000 हर महीने EPF में जमा करते हैं और हर साल इसमें 5% का इजाफा करते हैं। मौजूदा 8.25% की सालाना ब्याज दर अगले 30 वर्षों तक स्थिर मान ली जाए, तो 60 साल की उम्र में आपके पास अनुमानित 2.21 करोड़ का रिटायरमेंट फंड तैयार हो सकता है। इस गणना में कंपनी का 3.67% का योगदान भी शामिल है। हालांकि ध्यान रखने वाली बात यह है कि EPF की ब्याज दरें समय-समय पर बदलती रहती हैं। उदाहरण के लिए, 1990 के दशक में यह 12% तक थी, जबकि हाल के वर्षों में यह 8% से 8.75% के दायरे में रही है।
NPS से 30 साल में कितना फंड बनेगा?
NPS का तरीका EPF से अलग है। NPS का पैसा शेयर बाजार और बॉन्ड्स में लगाया जाता है, इसलिए इसके रिटर्न बाजार की चाल पर निर्भर करते हैं। अगर आप 30 साल की उम्र में 5,000 महीने से शुरुआत करते हैं और सालाना 5% निवेश बढ़ाते हैं, तो 'Active Choice' विकल्प के तहत (जिसमें 75% पैसा इक्विटी यानी शेयर बाजार और 25% सरकारी बॉन्ड्स में लगता है) औसतन 12.7% का सालाना रिटर्न मिल सकता है। इस अनुमान के हिसाब से 30 साल बाद आपका कुल रिटायरमेंट फंड 2.65 करोड़ रुपये बन सकता है।
NPS की रकम कैसे मिलेगी?
NPS में 60 साल की उम्र पूरी होने पर आप पूरा पैसा एक साथ नहीं निकाल सकते।
- 60% लम्पसम (एकमुश्त): आप कुल फंड का 60% यानी करीब 1.59 करोड़ रुपये कैश निकाल सकते हैं, जो पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है।
- 40% एन्युटी (Annuity): बाकी 40% राशि से आपको एन्युटी प्लान खरीदना होता है। अगर इस पर 6.75% का सालाना रिटर्न मान लें, तो आपको हर महीने करीब 60 हजार रुपये की पेंशन आजीवन मिलती रहेगी।
EPF क्या है और कैसे काम करता है?
EPF एक सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न वाली सरकारी बचत योजना है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता (कंपनी) दोनों मिलकर योगदान देते हैं। इस पर मिलने वाला ब्याज हर महीने के बैलेंस के आधार पर गिना जाता है और साल के अंत में खाते में जोड़ दिया जाता है। 15,000 रुपये तक बेसिक सैलरी वाले संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए इसमें शामिल होना अनिवार्य है।
NPS क्या है और कैसे काम करता है?
NPS एक मार्केट-लिंक्ड रिटायरमेंट स्कीम है। इसमें निवेशक को अपनी पसंद के पेंशन फंड मैनेजर और निवेश का तरीका (Auto या Active Choice) चुनने की आजादी मिलती है। चूंकि इसमें इक्विटी (शेयर) का हिस्सा ज्यादा होता है, इसलिए लंबे समय में यह EPF के मुकाबले ज्यादा रिटर्न देने का दम रखता है।
आपके लिए क्या बेहतर है?
अगर आप बिना किसी जोखिम के सुरक्षित और तय रिटर्न चाहते हैं, तो EPF एक मजबूत जरिया है। लेकिन अगर आप थोड़ा जोखिम उठाकर अपने पैसों पर ज्यादा ग्रोथ चाहते हैं और रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन भी चाहते हैं, तो ऐतिहासिक आंकड़ों के हिसाब से NPS लंबे समय में बड़ा कॉर्पस बनाने में आगे निकल सकता है।
