सैलरीड क्लास के लोगों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। दरअसल, EPFO ने नौकरी बदलने वालों के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। अब जब भी कोई कर्मचारी नई नौकरी ज्वाइन करेगा, उसका पुराना पीएफ अकाउंट अपने आप नए अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगा। यानी अब न तो किसी फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही पुराने नियोक्ता की मंजूरी की। अब ऑटोमैटिक आपके पुराने अकाउंट का पैसा नए अकाउंट में कुछ ही दिनों में ट्रांसफर हो जाएगा। पहले इस प्रोसेस में महीनों लग जाते थे लेकिन अब ये काम कुछ ही दिन में पूरा हो जाएगा।
पहले जब कोई कर्मचारी नौकरी बदलता था, तो उसे फॉर्म-13 भरकर पुराने नियोक्ता से साइन करवाना पड़ता था। कई बार इस प्रक्रिया में हफ्तों या महीनों का समय लग जाता था। अब ऐसा नहीं होगा। नई नौकरी ज्वाइन करते ही जब नियोक्ता ज्वाइनिंग डेट अपडेट करेगा, सिस्टम अपने आप पीएफ ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू कर देगा। इससे कर्मचारी को न तो दावा करना होगा और न ही किसी एचआर के पीछे भागना पड़ेगा।
ईपीएफओ ने यह भी सुनिश्चित किया है कि हर कर्मचारी के पास जीवनभर एक ही यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) रहेगा। पहले गलती से एक ही व्यक्ति के कई यूएएन बन जाते थे, जिससे ट्रांसफर या निकासी में दिक्कत आती थी। अब सिस्टम इस तरह अपडेट किया गया है कि अगर किसी का यूएएन पहले से मौजूद है, तो नया बनने से रोक दिया जाएगा।
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पहले पीएफ ट्रांसफर की प्रक्रिया में सबसे बड़ी मुश्किल थी नियोक्ता के हस्ताक्षर या गलत जानकारी की वजह से देरी। अब ईपीएफओ ने इसे पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। आधार आधारित ई-साइन और ई-केवाईसी के जरिए सिस्टम खुद वेरिफिकेशन कर लेता है। पहले जहां ट्रांसफर में 30 से 45 दिन लगते थे, अब यह सिर्फ 7 से 10 दिनों में पूरा हो जाता है।
अब कर्मचारियों को यह देखने के लिए अलग-अलग पासबुक चेक करने की जरूरत नहीं है कि पैसा ट्रांसफर हुआ या नहीं। जैसे ही ट्रांसफर पूरा होता है, पुरानी पासबुक में "जीरो बैलेंस" दिखेगा और नई पासबुक में कुल रकम दिखाई देगी। इससे कर्मचारियों को अपने निवेश और ब्याज का पूरा हिसाब साफ-साफ नजर आएगा।
पहले ट्रांसफर में देरी का एक कारण यह भी था कि पुराने नियोक्ता ने एग्जिट डेट अपडेट नहीं की होती थी। अब ईपीएफओ ने यह नियम बना दिया है कि अगर नियोक्ता ऐसा नहीं करता, तो कर्मचारी खुद आधार ओटीपी से एग्जिट डेट अपडेट कर सकता है। इससे किसी तरह की देरी नहीं होगी।
पहले अगर ट्रांसफर में ज्यादा वक्त लगता था, तो पुराने खाते पर ब्याज मिलना बंद हो जाता था। अब ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि जब तक पैसा नए खाते में नहीं पहुंचता, ब्याज मिलता रहेगा। इससे कर्मचारियों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा।