Emergency Fund : जीवन में कब कौन-सी आर्थिक परेशानी सामने आ जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। नौकरी छूट जाना, अचानक बीमारी, किसी बड़े घरेलू खर्च का आ जाना या फिर बिजनेस में नुकसान जैसी परिस्थितियां किसी भी व्यक्ति की वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे समय में इमरजेंसी फंड सबसे बड़ा सहारा बनता है । वित्तीय एक्सपर्ट्स का मानना है कि हर व्यक्ति को अपनी नियमित आय के अलावा एक अलग इमरजेंसी फंड तैयार रखना चाहिए, ताकि मुश्किल समय में कर्ज लेने या निवेश तोड़ने की जरूरत न पड़े। आइए समझते इसकी फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planning) क्यों जरूरी है।
क्या होता है Emergency Fund?
इमरजेंसी फंड वह राशि होती है जिसे केवल आपातकालीन परिस्थितियों के लिए सुरक्षित रखा जाता है। यह पैसा आपकी रोजमर्रा की जरुरतों या निवेश के लिए नहीं होता। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक संकट के समय परिवार की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह फंड बैंक सेविंग अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट या अन्य ऐसे साधनों में रखा जा सकता है जहां जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसा निकाला जा सके।
Emergency Fund की ABCD समझिए
A यानी Assess (आकलन करें)
सबसे पहले अपनी मासिक जरूरतों का आकलन करें। इसमें घर का किराया, राशन, बिजली-पानी के बिल, बच्चों की पढ़ाई, EMI और अन्य जरूरी खर्च शामिल करें। इससे आपको पता चलेगा कि हर महीने कितनी राशि की आवश्यकता होती है।
B यानी Build (फंड तैयार करें)
एक बार खर्च का आकलन हो जाने के बाद धीरे-धीरे इमरजेंसी फंड बनाना शुरू करें। हर महीने अपनी आय का एक निश्चित हिस्सा अलग खाते में जमा करें। छोटी राशि से शुरुआत करके भी कुछ वर्षों में बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है।
C यानी Keep it Convenient (आसानी से उपलब्ध रखें)
इमरजेंसी फंड ऐसी जगह रखें जहां से जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसा निकाला जा सके। बहुत लंबी अवधि के लॉक-इन निवेश या जोखिम वाले साधनों में यह राशि नहीं रखनी चाहिए। सेविंग अकाउंट या लिक्विड फंड जैसे विकल्प बेहतर माने जाते हैं।
D यानी Discipline (अनुशासन बनाए रखें)
इमरजेंसी फंड का उपयोग केवल वास्तविक आपात स्थिति में ही करें। छुट्टियों, शॉपिंग या गैर-जरूरी खर्चों के लिए इस राशि को नहीं छूना चाहिए। वित्तीय अनुशासन ही इस फंड की सबसे बड़ी ताकत है।
बैंक में कितना कैश रखना चाहिए?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक किसी व्यक्ति के पास कम से कम 6 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर इमरजेंसी फंड होना चाहिए। अगर आपकी मासिक जरूरी खर्च राशि 30,000 रुपये है, तो कम से कम 1.8 लाख रुपये का इमरजेंसी फंड होना चाहिए। वहीं जिन लोगों की नौकरी अस्थिर है, फ्रीलांस आय है या वे खुद का बिजनेस करते हैं, उन्हें 9 से 12 महीने के खर्च के बराबर फंड तैयार रखने की सलाह दी जाती है। परिवार की जिम्मेदारियां अधिक होने पर भी बड़ा इमरजेंसी फंड रखना फायदेमंद माना जाता है। इससे किसी भी वित्तीय झटके का सामना आसानी से किया जा सकता है।
क्यों जरूरी है मजबूत Emergency Fund?
इमरजेंसी फंड होने से अचानक खर्च आने पर क्रेडिट कार्ड या महंगे कर्ज पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इसके अलावा निवेश को समय से पहले तोड़ने की जरूरत भी नहीं पड़ती, जिससे लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों पर असर नहीं पड़ता। यह फंड मानसिक तनाव को भी कम करता है क्योंकि व्यक्ति को पता होता है कि जरूरत पड़ने पर उसके पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है।
वित्तीय सुरक्षा की मजबूत नींव के लिए इमरजेंसी फंड बेहद जरूरी है। यह केवल बचत नहीं बल्कि आर्थिक सुरक्षा कवच है। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि हर व्यक्ति अपनी आय और खर्च के अनुसार कम से कम 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर राशि अलग रखे। सही योजना, नियमित बचत और अनुशासन के साथ बनाया गया इमरजेंसी फंड किसी भी मुश्किल समय में परिवार का सबसे भरोसेमंद साथी साबित हो सकता है।
