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Term Insurance कब तक रखें एक्टिव? 55 की उम्र में बंद करें या 80 साल तक चलाएं

टर्म इंश्योरेंस लेते समय 55 या 80 वर्ष की आयु तक का कवर चुनना आपकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं और जिम्मेदारियों पर निर्भर करता है, क्योंकि लंबी अवधि परिवार को अधिक सुरक्षा देती है और आपकी कमाई को सुरक्षित रखती है।

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Term Insurance

अपनी फैमिली के फ्यूचर को सिक्योर करने के लिए टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance) लेना सबसे पहला और समझदारी भरा कदम माना जाता है। लेकिन टर्म प्लान खरीदते समय सबसे बड़ा कन्फ्यूजन इस बात को लेकर होता है कि पॉलिसी की अवधि (Policy Tenure) यानी मैच्योरिटी उम्र क्या चुनी जाए। लोग अक्सर इस कशमकश में रहते हैं कि टर्म इंश्योरेंस को 55-60 साल की वर्किंग एज तक ही एक्टिव रखना चाहिए या फिर इसे 80 साल की बुजुर्ग उम्र तक बढ़ाना फायदेमंद रहता है। इंश्योरेंस कंपनियां अक्सर लंबे समय तक का कवर बेचने की कोशिश करती हैं, लेकिन आंख बंद करके 80 साल तक का कवर चुनना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि किस उम्र तक टर्म प्लान लेना आपके और आपके परिवार के लिए सबसे बेस्ट डिसीजन होगा।

टर्म इंश्योरेंस का असली मकसद क्या है?

इस फैसले तक पहुंचने से पहले यह समझना जरूरी है कि टर्म इंश्योरेंस कोई इन्वेस्टमेंट या सेविंग्स प्लान नहीं है, बल्कि यह एक 'प्योर प्रोटेक्शन टूल' (Pure Protection Tool) है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर पॉलिसी की अवधि के दौरान पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को एकमुश्त बीमा राशि (Sum Assured) मिलती है, जिससे वे अपने कर्ज चुका सकें और अपनी लाइफस्टाइल को मेंटेन रख सकें। टर्म इंश्योरेंस का मुख्य उद्देश्य आपके उन वर्किंग ईयर्स (कमाने वाले सालों) को सुरक्षित करना होता है, जब आपके ऊपर परिवार की वित्तीय जिम्मेदारियां सबसे ज्यादा होती हैं।

55 से 60 साल तक का कवर क्यों माना जाता है बेस्ट?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि 55 या 60 साल की उम्र तक टर्म इंश्योरेंस रखना सबसे ज्यादा प्रैक्टिकल और फायदेमंद होता है। इसके पीछे एक सीधा लॉजिक है इस उम्र तक आते-आते अधिकांश लोग अपनी बड़ी वित्तीय जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाते हैं। बच्चों की पढ़ाई पूरी हो चुकी होती है, उनकी शादियां हो जाती हैं और होम लोन या कार लोन जैसे बड़े कर्ज भी चुकता हो जाते हैं। इसके साथ ही, रिटायरमेंट के करीब पहुंचते-पहुंचते आपके पास पीएफ (PF), म्यूचुअल फंड या अन्य माध्यमों से एक अच्छा-खासा रिटायरमेंट फंड भी तैयार हो जाता है। ऐसी स्थिति में, 60 साल के बाद आपके परिवार को किसी बड़े रिस्क कवर की जरूरत नहीं रह जाती।

80 साल तक का कवर लेने में क्या है नुकसान?

कई लोग सोचते हैं कि 80 साल तक का कवर लेने से डेथ बेनिफिट मिलने की संभावना बहुत बढ़ जाती है, लेकिन इसके बदले आपको जो कीमत चुकानी पड़ती है, वह काफी मोटी होती है। आप जितने लंबे समय का कवर चुनते हैं, बैंक या इंश्योरेंस कंपनी आपसे उतना ही ज्यादा प्रीमियम वसूलती है। उदाहरण के लिए, अगर एक 30 साल का व्यक्ति 60 साल की उम्र तक का कवर लेता है, तो उसका सालाना प्रीमियम काफी कम होगा। लेकिन अगर वही व्यक्ति 80 साल तक का कवर चुनता है, तो उसका प्रीमियम 50% से 70% तक बढ़ सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि आपको यह बढ़ा हुआ प्रीमियम अपनी जेब से हर साल तब तक भरना होगा जब तक आप बुजुर्ग नहीं हो जाते।

अपनी गाढ़ी कमाई कैसे बचाएं?

80 साल तक का भारी-भरकम प्रीमियम भरने के बजाय समझदारी इसी में है कि आप 55 या 60 साल की उम्र तक का ही टर्म प्लान लें। ऐसा करने से प्रीमियम के रूप में आपकी जो मोटी रकम बचेगी, उसे आप हर महीने म्यूचुअल फंड एसआईपी (SIP), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) या इक्विटी में इन्वेस्ट कर सकते हैं। यह बचा हुआ पैसा अगले 25-30 सालों में कंपाउंडिंग की ताकत से एक बहुत बड़ा वेल्थ कॉर्पस (धन का भंडार) बन जाएगा। यानी जब आप 60 की उम्र में रिटायर होंगे, तो आपके पास परिवार के लिए बीमा के भरोसे रहने के बजाय खुद का जमा किया हुआ करोड़ों का फंड होगा, जो किसी भी इमरजेंसी में आपके काम आएगा।

आपके लिए क्या है सही फैसला?

टर्म इंश्योरेंस का चुनाव इमोशनल होकर नहीं, बल्कि अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को कैलकुलेट करके करना चाहिए। अगर आपकी शादी देर से हुई है या आपके ऊपर कर्ज का बोझ लंबे समय तक रहने वाला है, तो ही आप 65 साल तक का कवर सोच सकते हैं। अन्यथा, 55 से 60 साल की उम्र का टर्म प्लान चुनना और बाकी पैसों को सही जगह इन्वेस्ट करना ही आपकी कमाई को बचाने और परिवार को सही सुरक्षा देने का सबसे बेहतरीन फॉर्मूला है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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