Electricity Demand to Hit Record 270 GW: देश में बिजली की मांग में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, रविवार को देश की अधिकतम बिजली मांग घटकर 238.15 गीगावाट (जीडब्ल्यू) रह गई, जबकि शनिवार को यह रिकॉर्ड 256 गीगावाट तक पहुंच गया था। रविवार को अधिकांश वाणिज्यिक और औद्योगिक संस्थान बंद रहते हैं, जिससे बिजली की खपत अपने आप कम हो जाती है। यही वजह रही कि बिजली की मांग में इस दिन गिरावट दर्ज की गई।
बिजली की मांग लगातार ऊंचे स्तर पर
पीटीआई (भाषा) की एक रिपोर्ट के अनुसार, बिजली मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि रविवार को पूरी की गई अधिकतम बिजली आपूर्ति 237.21 गीगावाट रही। इसका मतलब है कि मांग और आपूर्ति के बीच करीब 0.93 गीगावाट का अंतर रहा। हालांकि यह अंतर बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन यह दर्शाता है कि बिजली की मांग लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही
अगर पिछले कुछ दिनों की बात करें तो शनिवार को 256 गीगावाट की मांग अब तक का रिकॉर्ड स्तर रहा, जबकि उससे एक दिन पहले यानी शुक्रवार को यह 252.07 गीगावाट थी। इससे साफ है कि तापमान बढ़ने के साथ बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है।
पिछले वर्षों के आंकड़े भी यही ट्रेंड दिखाते हैं। जून 2025 में अधिकतम बिजली मांग 242.77 गीगावाट रही थी, जबकि सरकार ने 277 गीगावाट का अनुमान लगाया था। वहीं, मई 2024 में 250 गीगावाट और सितंबर 2023 में 243.27 गीगावाट की मांग दर्ज की गई थी।
इस साल भीषण गर्मी पड़ने का अनुमान
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस साल भीषण गर्मी पड़ने का अनुमान जताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मई और जून में तापमान और बढ़ेगा, जिससे एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों का इस्तेमाल ज्यादा होगा। इसका सीधा असर बिजली की मांग पर पड़ेगा और यह और बढ़ सकती है।
मांग करीब 270 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान
बिजली मंत्रालय का अनुमान है कि इस साल गर्मियों में अधिकतम बिजली मांग करीब 270 गीगावाट तक पहुंच सकती है। मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए यह आंकड़ा हासिल होना मुश्किल नहीं लगता। अप्रैल महीने में भी जैसे-जैसे गर्मी बढ़ी है, बिजली की मांग में इजाफा हुआ है। उदाहरण के तौर पर, 22 अप्रैल को यह 239.70 गीगावाट थी, जो 23 अप्रैल को बढ़कर 240.12 गीगावाट हो गई। बढ़ती गर्मी और बिजली उपकरणों के अधिक इस्तेमाल के कारण आने वाले समय में बिजली की मांग और बढ़ने की पूरी संभावना है। ऐसे में सरकार और बिजली कंपनियों के लिए आपूर्ति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
