प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्र के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि उन पर लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) को 1,322 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले कथित ऋण धोखाधड़ी का आरोप है। आरोप है कि सुभाष चंद्रा ने LICHFL से कर्ज लेने के लिए अपनी कुल संपत्ति को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और फिर ऋण चुकाने में विफल रहे। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई की एफआईआर का संज्ञान लेते हुए मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इस आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज
सीबीआई ने पहले LICHFL की शिकायत पर मामला दर्ज किया था, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। LICHFL ने अपनी शिकायत में, जो सीबीआई एफआईआर का हिस्सा है, आरोप लगाया है कि चंद्रा ने 980 करोड़ रुपये के दो ऋणों की मंजूरी और वितरण के लिए नेट वर्थ सर्टिफिकेट जमा किए थे। अगस्त में LICHFL की शिकायत के अनुसार, इन ऋणों पर डिफॉल्ट के कारण 1,322 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
NCLAT में दायर की गई थी याचिका
LICHFL उन ऋणदाताओं में से एक थी जिसने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में याचिका दायर कर हाल ही में NCLT द्वारा पारित पुनर्भुगतान योजना का विरोध किया था। इस योजना के तहत लेनदारों को चंद्र की निजी संपत्ति से लगभग 22,006 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले केवल 6.5 करोड़ रुपये वसूलने की अनुमति दी गई थी।
इन कंपनियों ने भी लिया कर्ज
यह शिकायत वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए 500 करोड़ रुपये के ऋण से संबंधित है, जिसमें पैन इंडिया इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड सह-ऋणदाता है, और डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए 480 करोड़ रुपये के ऋण से संबंधित है, जिसमें स्पिरिट इंफ्रा पावर एंड मल्टी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड सह-ऋणदाता है।
शिकायत के अनुसार, 500 करोड़ रुपये का ऋण कंपनी के अधिग्रहण, अतिरिक्त वित्तपोषण और कारोबार के विस्तार के लिए मंजूर किया गया था। इस ऋण के लिए सुभाष चंद्रा ने 28 मार्च, 2018 को निजी हैसियत से एक चलत प्रत्याभूति (Continuing Guarantee) दी थी।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि 480 करोड़ रुपये की डिजिटल सुविधा को एक अलग ऋण खाते के जरिए एक किराया-प्रतिबंध सुविधा के रूप में एक किराया-प्रतिभूति सुविधा के रूप में स्वीकृत किया गया था, और चंद्र द्वारा निष्पादित निरंतर गारंटी द्वारा सुरक्षित किया गया था।
नेट-वर्थ गलत दिखाने का आरोप
ऋणदाता के अनुसार, चंद्र द्वारा प्रस्तुत नेट-वर्थ प्रमाण पत्र डीजेएम एंड कंपनी द्वारा 28 मार्च, 2018 को जारी किया गया था, जिसमें उनकी नेट-वर्थ लगभग 59,000 करोड़ रुपये बताई गई थी। LICHFL ने कहा कि डिजिटल सुविधा आंशिक रूप से चंद्र द्वारा प्रस्तुत नेट-वर्थ प्रमाण पत्र के आधार पर स्वीकृत की गई थी, जिसे चार्टर्ड अकाउंटेंट एमपीजे एंड कंपनी द्वारा 6 जुलाई, 2018 को जारी किया गया था। प्रमाण पत्र में उनकी नेट-वर्थ 40,562 करोड़ रुपये बताई गई थी। LICHFL के अनुसार, बाद में दोनों ऋण चुकाने में विफल रहे।
CBI की शिकायत में कहा गया है कि दिवालियापन और दिवालिया संहिता, 2016 के तहत हुई कार्यवाही के दौरान, चंद्रा ने LICHFL को प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों में बताई गई कुल संपत्ति होने से इनकार किया। FIR के अनुसार, उद्योगपति ने वर्ष 2024 में अपनी नेटवर्थ 31.79 करोड़ रुपये बताई, जबकि 2017-18 में यह अधिकतम 40,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होने का दावा किया था।
कर्ज लेने वाली कंपनियों को धोखा दिया
FIR में आरोप लगाया गया है कि सुभाष चंद्रा ने कर्ज लेने वाली कंपनियों वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड, पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ-साथ उनके अधिकारियों और निदेशकों की मिलीभगत से LIC हाउसिंग फाइनेंस (LICHFL) को धोखा दिया। इसके जरिए LICHFL को इन कंपनियों को कर्ज देने के लिए राजी किया गया। आरोप है कि इन कंपनियों ने बाद में कर्ज की रकम का दुरुपयोग किया।
