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ECLGS 5.0: पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित कंपनियों को राहत देगी ये योजना, क्रिसिल रेटिंग्स का अनुमान

ECLGS 5.0 योजना पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित कंपनियों को वर्किंग कैपिटल सहायता देगी। इससे MSME और अन्य उद्योगों को राहत मिलेगी और कैश प्रवाह बेहतर होगा।

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पश्चिम एशिया संघर्ष का कारोबार पर असर

ECLGS 5.0: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारतीय उद्योगों और कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और व्यापारिक गतिविधियों में देरी के कारण कंपनियों की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) की जरूरत बढ़ गई है। ऐसे में केंद्र सरकार की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (Emergency Credit Line Guarantee Scheme) 5.0 कंपनियों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है।

कंपनियों को मिलेगी तत्काल वित्तीय सहायता

क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, ECLGS 5.0 उन कंपनियों को समय पर वित्तीय सहायता प्रदान करेगी जो पश्चिम एशिया संकट के कारण कैश की कमी और बढ़ती लागत का सामना कर रही हैं। यह योजना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के साथ-साथ गैर-MSME कंपनियों को भी मदद पहुंचाएगी।

पिछले महीने से लागू हुई योजना

ECLGS 5.0 पिछले महीने से प्रभावी हो चुकी है। इस योजना के लिए सरकार ने 2.55 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य उन व्यवसायों को अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराना है जिनकी कार्यशील पूंजी की जरूरत अचानक बढ़ गई है और जिन्हें कारोबार जारी रखने के लिए अतिरिक्त फंड की आवश्यकता है।

कितना मिलेगा अतिरिक्त कर्ज

योजना के तहत पात्र और मानक कैटेगरी के उधारकर्ता पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में अपनी अधिकतम कार्यशील पूंजी का 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण ले सकते हैं। हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ रुपये तय की गई है। इस ऋण की अवधि पांच वर्ष होगी और पहले एक वर्ष तक मूलधन भुगतान पर मोरेटोरियम की सुविधा भी मिलेगी।

गारंटी कवर की विशेष व्यवस्था

ECLGS 5.0 के तहत MSME इकाइयों को लिए गए ऋण पर 100 प्रतिशत सरकारी गारंटी मिलेगी। वहीं गैर-MSME कंपनियों और एयरलाइंस के लिए 90 प्रतिशत तक गारंटी कवर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे बैंकों का जोखिम कम होगा और वे अधिक आसानी से ऋण उपलब्ध करा सकेंगे।

इन आठ क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मांग की उम्मीद

क्रिसिल का मानना है कि इस योजना का सबसे अधिक लाभ आठ प्रमुख क्षेत्रों को मिल सकता है। इनमें सिरेमिक उद्योग, एयरलाइंस, ऑटो कंपोनेंट्स, डायमंड पॉलिशिंग, बासमती चावल निर्यात, पॉलिएस्टर टेक्सटाइल, स्पेशियलिटी केमिकल्स और फ्लेक्सिबल पैकेजिंग निर्माता शामिल हैं। इन क्षेत्रों पर बढ़ती लागत और सप्लाई चेन में रुकावट का सबसे ज्यादा असर पड़ा है।

30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है कार्यशील पूंजी की जरुरत

रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिसिल द्वारा रेटेड कंपनियों की कार्यशील पूंजी की आवश्यकता चालू वित्त वर्ष में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। हालांकि उत्पादों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि होने से कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन संघर्ष के प्रभाव के कारण कारोबार की वृद्धि दर धीमी पड़ने की आशंका बनी हुई है।

बढ़ेगा कर्ज, लेकिन भुगतान की क्षमता बनी रहेगी

एएनआई के मुताबिक क्रिसिल रेटिंग्स के डिप्टी चीफ रेटिंग्स ऑफिसर मनीष गुप्ता ने कहा कि ECLGS 5.0 के जरिए कंपनियों की अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरत का करीब एक-तिहाई हिस्सा तुरंत पूरा किया जा सकता है। बाकी जरूरत बैंक अपनी ऋण सीमा बढ़ाकर पूरी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे कंपनियां बिना परिचालन प्रभावित किए अपनी अस्थायी वित्तीय जरूरतों को पूरा कर सकेंगी। हालांकि योजना के उपयोग से कंपनियों का कुल कर्ज करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, लेकिन अधिकांश कंपनियों के पास 2028 और 2029 से ऋण चुकाने के लिए पर्याप्त नकदी प्रवाह रहने की संभावना है।

शुरुआती दौर में दिखा मजबूत रुझान

एएनआई के मुताबिक क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक हिमांक शर्मा के अनुसार, योजना का उपयोग इस बात पर निर्भर करेगा कि पश्चिम एशिया संघर्ष कितने समय तक चलता है और उसका वैश्विक वस्तु कीमतों तथा सप्लाई चेन पर कितना असर पड़ता है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 9 जून तक ECLGS 5.0 के तहत 1.06 लाख गारंटी जारी की जा चुकी थीं, जिनकी कुल राशि 48,484.26 करोड़ रुपये रही। इससे साफ है कि योजना को शुरुआती दौर में ही उद्योग जगत से अच्छा समर्थन मिल रहा है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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