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खुशखबरी! अब श्रमिकों के बच्चों को मिलेगी डबल स्कॉलरशिप, श्रम मंत्रालय ने बदला नियम

Scholarship Reform: श्रम मंत्रालय ने असंगठित श्रमिकों के बच्चों के लिए बड़ा सुधार किया है। अब मंत्रालय की कल्याणकारी छात्रवृत्ति पाने वाले छात्र, केंद्र या राज्य सरकार की किसी भी मेरिट आधारित स्कॉलरशिप का लाभ भी साथ में उठा सकेंगे। इस निर्णय का उद्देश्य श्रमिक परिवारों की आर्थिक बाधाएं दूर कर होनहार छात्रों की शिक्षा को निरंतर और मजबूत बनाना है।

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श्रम मंत्रालय की छात्रवृत्ति पाने वाले छात्र अब अन्य सरकारी योजनाओं के लिए भी पात्र होंगे (तस्वीर-istock)

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Scholarship Reform: केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के बच्चों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब श्रम कल्याण योजना के तहत छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थी, सरकार की अन्य 'मेरिट' (योग्यता) आधारित छात्रवृत्तियों का लाभ भी उठा सकेंगे। इस बदलाव का सीधा फायदा उन होनहार छात्रों को मिलेगा जो अपनी मेहनत से अच्छी रैंक लाते हैं, लेकिन नियमों के कारण दूसरी छात्रवृत्ति से वंचित रह जाते थे।

क्या है नया बदलाव?

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक सोमवार को मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, अब 'श्रम कल्याण छात्रवृत्ति' लेने वाले छात्र केंद्र या राज्य सरकार की किसी भी अन्य मेरिट-आधारित योजना के लिए भी पात्र होंगे। पहले के नियमों में यह पाबंदी थी कि अगर कोई छात्र श्रम मंत्रालय से आर्थिक सहायता ले रहा है, तो वह किसी दूसरी सरकारी एजेंसी से छात्रवृत्ति नहीं ले सकता था। इस सुधार के बाद अब छात्र अपनी जरूरत और अपनी काबिलियत, दोनों के दम पर सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

क्यों पड़ी इस सुधार की जरुरत?

श्रम मंत्रालय की यह योजना मुख्य रूप से उन निर्बल श्रमिक परिवारों के लिए है जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते थे। मंत्रालय का उद्देश्य इन परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना और शिक्षा की निरंतरता को बनाए रखना है। पहले यह योजना केवल जरुरत के आधार पर चलती थी। इसमें मेधावी छात्रों के लिए कोई अलग से मेरिट का प्रावधान नहीं था। लेकिन अब सरकार ने माना है कि एक श्रमिक का बच्चा अगर पढ़ाई में बहुत अच्छा है, तो उसे उसकी गरीबी के लिए दी जाने वाली सहायता के साथ-साथ उसकी काबिलियत (मेरिट) का सम्मान भी मिलना चाहिए।

'मेरिट' और 'जरुरत' का संगम

संशोधित दिशानिर्देशों के तहत अब एक स्पष्ट विभाजन किया गया है:-

  • कल्याण आधारित सहायता: यह वह राशि है जो छात्र को उसके परिवार की आर्थिक स्थिति और श्रमिक पृष्ठभूमि के कारण मिलती है।
  • मेरिट आधारित सहायता: यह वह राशि है जो छात्र को उसकी परीक्षाओं में बेहतरीन प्रदर्शन या किसी विशेष योग्यता के कारण केंद्र या राज्य सरकार से मिलती है।

नए नियम के बाद अगर कोई छात्र श्रम मंत्रालय की छात्रवृत्ति ले रहा है और साथ ही वह किसी सरकारी मेरिट लिस्ट में भी आता है, तो उसे दोनों लाभ मिल सकेंगे। यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में असमानता को कम करने और गरीब बच्चों को ऊंचे सपने देखने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

असंगठित क्षेत्र के करोड़ों परिवारों को राहत

भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की एक बड़ी संख्या है। इन परिवारों के लिए बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च उठाना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। सरकार के इस 'श्रम-हितैषी' सुधार से अब छात्र बेहतर संस्थानों में दाखिला ले सकेंगे और पैसों की कमी उनकी राह में रोड़ा नहीं बनेगी। मंत्रालय का मानना है कि इस दोहरी सहायता से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अधिक लगन से पढ़ाई कर सकेंगे।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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